नयी दिल्ली। देश भर में प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसकी एक बड़ी प्याज की आपूर्ति की कमी है। सरकार ने प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये हैं, मगर अभी तक प्याज के दाम नीचे नहीं उतर रहे हैं। नवंबर मे प्याज के दाम 100 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गये, जबकि राष्ट्रीय राजधानी में प्याज की खुजरा कीमतें 70 रुपये प्रति किलो तक चढ़ गये। प्याज की कीमतों को काबू में लाने और आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए पिछले सप्ताह यूनियन कैबिनेट ने 1.2 लाख टन प्याज का आयात करने को हरी झंडी दिखा दी थी। उपभोक्ता मामलों के सचिव ए के श्रीवास्तव ने विभिन्न राज्यों के साथ मांग, आपूर्ति और कीमतों की समीक्षा के लिए बैठक की। इसी कड़ी में सूत्रों के हवाले से खबर है कि भारत के लिए सर्वाधिक विदेशी मुद्रा कमाने वाले दो एक्सचेजों में से एक एमएमटीसी ने 6,090 टन प्याज के आयात के लिए करार किया है, जो जल्दी ही इजिप्ट से मुम्बई पहुँचेगी।
बाजार में प्याज पहुँचायेगा नेफेड
जहाँ प्याज आयात करने की जिम्मेदारी एमएमटीसी की होगी, वहीं इसे घरेलू बाजारों में पहुँचाने की जिम्मेदारी नेफेड की होगी। 19 नवंबर को खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा था कि 2019-20 के खरीफ और लेट-खरीफ सीजन में प्याज का उत्पादन 26 प्रतिशत घटकर 52 लाख टन रहने का अनुमान है, जिससे आपूर्ति और कीमतों पर दबाव पड़ेगा। लोकसभा को दिये गये एक लिखित जवाब में पासवान ने कहा था कि प्याज एक मौसमी फसल है, जिसमें रबी की फसल की अवधि मार्च से जून, खरीफ अक्टूबर से दिसंबर और देर-खरीफ की अवधि जनवरी-मार्च होती है। जुलाई से अक्टूबर के दौरान बाजार में आपूर्ति रबी सीजन से भंडार किये गये प्याज से होती है।
क्यों कम हुई प्याज की आपूर्ति
खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने यह भी बताया था कि 2019-20 के दौरान मानसून के देर से आने के कारण खरीफ प्याज के बोए गए क्षेत्र में गिरावट के साथ-साथ बुवाई में 3-4 सप्ताह की देरी भी हुई। इसके अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के प्रमुख राज्यों में लंबे समय तक बेमौसम बारिश हुई, जिससे इन क्षेत्रों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ। इससे खरीफ की फसल का उत्पादन प्रभावित हुआ और आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतें बढ़ीं। कुछ कारोबारी मानते हैं कि विदेशों से प्याज आयात करने पर इसकी कीमतों में कुछ कमी आ सकती है।
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