Semiconductor Hub: आपको बताते चलें कि अगर भारत को सेमीकंडक्टर हब बनना है, तो उसको अपने प्रोडक्शन में और तेजी लानी पड़ेगी। क्योंकि उसे चीन और अमेरिका जैसे देशों को पीछे छोड़ना पड़ेगा और फिलहाल अमेरिका और चीन दोनों ही काफी बड़े लेवल पर सेमीकंडक्टर बना रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि भारत में सेमीकंडक्टर बनाने का पहला प्लांट ही अमेरिकी कंपनी द्वारा लगाया जा रहा है। यह प्लांट पहला सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन इस साल के आखिरी महीने यानी दिसंबर 2024 से शुरू कर सकता है। इसके अलावा टाटा ग्रुप दूसरी चिप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बना रहा है।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें की टाटा का एक चिप मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अगले साल जनवरी से मार्च के महीने तक प्रोडक्शन शुरू कर सकता है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए कई कंपनियों में होड़ मची हुई है। मिल रही जानकारी के मुताबिक इन कंपनियों में एचसीएल, फॉक्सकॉन और एडीबी भी शामिल हैं।

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आपको बताते चलें कि अगर भारत को सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में आगे निकलना है तो उसे चीन और अमेरिका को पीछे छोड़ना होगा। आपको बताते चलें कि फिलहाल चीन में 44 सेमी कंडक्टर कंपनियों ने प्लांट लगाने के लिए समझौता कर लिया है।

सेमीकंडक्टर बिजनेस को ट्रैक करने वाले एक संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 2 साल में पूरी दुनिया के अंदर 99 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का फैसला लिया गया है। इन देशों के मुकाबले अभी भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगने की प्रक्रिया भी काफी धीमी है।

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इस समय सेमीकंडक्टर हब के नाम से जाने जाने वाले ताइवान के साथ 11 कंपनियों ने समझौता किया है। वहीं 18 कंपनियों ने अमेरिका में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट खोलने का करार किया है।

इस समय मार्केट में सेमीकंडक्टर की मांग जबरदस्त तरीके से बढ़ी है। ऐसे में कोई भी देश सेमीकंडक्टर को इंपोर्ट करने के लिए किसी भी दूसरे देश पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहता है। इस समय जिस तरह से सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन की होड़ लगी हुई है। उससे पता चलता है कि आने वाले समय में आपको एक नहीं बल्कि कई सेमीकंडक्टर प्लांट आपको देखने को मिल सकते हैं और इन देशों के पास अपनी इकोनॉमी को बूस्ट करने का भी एक बेहतरीन मौका रहेगा।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें की टेक्नोलॉजी के मामले में नंबर वन कहां जाने वाला देश जापान भी 10 चिप मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करने जा रहा है। इसके अलावा साउथ कोरिया में चार प्लांट लग रहे हैं और दूसरे साउथ ईस्ट एशियन देशों में टोटल 7 नए चिप मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाए जाने वाले हैं।

वहीं भारत सरकार के मंत्री का कहना है कि उन्होंने खुद की मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का दौरा किया है और उन्होंने बताया है कि काम काफी तेजी से चल रहा है। भारत सरकार के मंत्री ने कहा कि कंपनियों ने उनके साथ अपने अनुभव साझा करके बताया है कि उन्हें भारत में मंजूरी लेने में सबसे कम दिक्कत का सामना करना पड़ा और यह काम काफी तेजी से हो गया। कंपनियों का कहना है कि ऐसा अनुभव अब तक उन्हें दूसरे किसी भी देश में नहीं हुआ है, जहां पर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को इतनी जल्दी और आसानी से मंजूरी मिल गई हो।

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इस समय भारत लगभग 90 प्रतिशत तक चिप बाहर से इंपोर्ट करता है। भारत की जीडीपी काफी तेजी से बढ़ रही है और इससे लोगों की इनकम में बढ़ोतरी हो सकती है और मार्केट में मनी फ्लो भी बढ़ेगा ऐसे में मार्केट से और भी ज्यादा गैजेट्स की खरीदारी की जाएगी जिनमें सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में आने वाले समय में इन सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की डिमांड और भी ज्यादा बढ़ सकती है।

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फिलहाल कई विदेशी देश भारत को अपना मार्केट बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा इसलिए है। क्योंकि भारत का कंज्यूमर बेस दुनिया में सबसे ज्यादा है और कोई भी कंपनी इतने बढ़िया मार्केट को छोड़ना नहीं चाहेगी।

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