Trump tariffs: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते दिन-ब-दिन मज़बूत हो रहे हैं। दोनों देश अब एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इस समझौते की तैयारी का पहला चरण शुरू हो चुका है और इसके तहत भारत के मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल 23 अप्रैल को अमेरिका की यात्रा पर जाएंगे।

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यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार को नई दिशा देने और आर्थिक संबंधों को गहराई देने की कोशिशों का हिस्सा है। इस पर ज्यादा जानकारी देते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के इकोनॉमिक पॉलिसी एडीटर लक्ष्मण रॉय ने बताया कि भारत-US ट्रेड डील पर चर्चा आगे बढ़ रही है।

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क्या है यह व्यापार समझौता?

भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement - BTA) पर काम कर रहे हैं। इसका मकसद 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाना है। अभी भारत और अमेरिका के बीच लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है।

इस समझौते का उद्देश्य है कि दोनों देश एक-दूसरे की ज़रूरतों को समझें और व्यापार में आ रही रुकावटों को हटाकर, एक मजबूत साझेदारी बनाएं।

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पहली किस्त की तैयारी शुरू

इस व्यापार समझौते को चरणों में लागू किया जाएगा। इसकी पहली किस्त या पहला चरण, 2025 के अंत तक तैयार हो सकता है। इसमें कुछ प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा:

व्यापार पर लगने वाले टैक्स (टैरिफ) को घटाना

भारतीय और अमेरिकी कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में बेहतर पहुंच देना

आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को मज़बूत करना

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नियमों को आसान बनाना ताकि व्यापार जल्दी और सुचारू रूप से हो सके

कृषि और तकनीक जैसे क्षेत्रों पर रहेगा ज़ोर

भारत और अमेरिका दोनों इस बात को लेकर सहमत हैं कि कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, आईटी (IT), इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, रक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना बेहद ज़रूरी है।

कृषि क्षेत्र में भारत चाहता है कि अमेरिका भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार के दरवाज़े और अधिक खोले। वहीं, अमेरिका भी चाहता है कि भारत कुछ अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले टैक्स कम करे।

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टैरिफ में बदलाव की उम्मीद

भारत सरकार अमेरिका से आने वाले कुछ उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) में कटौती करने पर विचार कर रही है। इससे अमेरिकी कंपनियों को भारत में कारोबार करना आसान होगा।

दूसरी तरफ भारत भी यह चाहता है कि अमेरिका भारतीय सामानों को अपने बाजार में ज्यादा जगह दे। इसके तहत भारत की टेक्सटाइल, दवाइयों और ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को फ़ायदा हो सकता है।

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राजनीतिक सहयोग भी होगा मज़बूत

यह व्यापार समझौता सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रिश्तों को भी मज़बूत करेगा। हाल ही में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस भारत दौरे पर आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा की।

दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत-अमेरिका संबंधों को आने वाले वर्षों में और भी गहराई दी जाएगी।

भविष्य की राह और उम्मीदें

राजेश अग्रवाल की अमेरिका यात्रा से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच संवाद और गहरा होगा। वह वहां अमेरिकी अधिकारियों और व्यापार संगठनों से मिलेंगे, ताकि पहली किस्त को अंतिम रूप दिया जा सके।

यह समझौता अगर समय पर और सही तरीके से पूरा हो गया, तो इससे न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक मज़बूत आर्थिक साझेदार के रूप में पहचान भी मिलेगी।

भारत और अमेरिका का यह प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए एक विन-विन (Win-Win) स्थिति हो सकती है। जहां भारत को नई तकनीक और बाजार मिलेंगे, वहीं अमेरिका को एक बड़ा और संभावनाओं से भरा बाजार मिलेगा।