UPI: भारत और न्यूजीलैंड ने गुरुवार को यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) सिस्टम की सुविधा, वर्क वीजा, ट्रेड की समस्या पर वक्त पर समाधान और बैकिंग रिलेशन में सुधार जैसे सहयोग को बढ़ाने का निर्णय लिया है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय बिजनेस की वर्तमान मात्रा को देखते हुए, दोनों पक्षों ने व्यापक क्षमता और आपसी हित के क्षेत्रों में आर्थिक संबंधों को बढ़ाने और ताल मेल लाने की जरूरत को स्वीकार किया है।
इन मुद्दों पर चर्चा भारत और न्यूजीलैंड के बीच उद्योग और उद्योग संघों के साथ एक सयुक्त बैठक के दौरान की गई।
इन चर्चाओं में वर्ष 1986 में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत गठित ज्वाइंट ट्रेड कमिटी (जेटीसी) के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
इस बैठक की सहा अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल की और भारत के न्यूजीलैंड के उच्च आयुक्त डेविड पाने ने की।
अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल ने यूपीआई प्रणाली की सुविधा, कीवी फलों का पैकेट प्रस्ताव ट्रांस शिपमेंट, हब कार्बन क्रेडिट उनके समय पर समाधान के लिए द्विपक्षीय व्यापार मुद्दों की प्राथमिकता सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों पर अस्थाई पहचान के लिए अग्रणी चर्चा की सकारात्मक रूप से सहारना की है।
वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि हम तकनीकी मुद्दों, सेवा के संबंधित मुद्दों जैसे वर्क वीजा से संबधित जो मुद्दे है और बैंकिंग संबंधों में और सुधार पर मिलकर कार्य करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूजीलैंड के हाई उच्चायुक्त द्वारा खोजे गए कुछ क्षेत्र में यूपीआई सिस्टम को बढ़ावा देना, कार्बन क्रेडिट को ऑपरेशन और इसके साथ ही कुछ स्पेसिफिक मुद्दे पर एक साथ में कार्य करना जैसे जेस्प्री द्वारा किए गए व्यापक प्रस्ताव और द्विपक्षीय फायदे के लिए गैर टैरिफ उपायों पर अनुरोधो की प्राथमिकता।
इसके साथ ही उन्होंने देशों के बीच हवाई संपर्क को बढ़ाने पर भी जोर दिया हैं।
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