ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा (Nomura) ने भारत के लिए FY2025 के लिए GDP ग्रोथ के लिए अपने पूर्वानुमान को बदल दिया है. इसे बदलकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले के अनुमान 6.9% से कम है. यह बदलाव दूसरी तिमाही में कमजोर प्रदर्शन और तीसरी तिमाही के लिए कमजोर संकेतों की वजह से है. बता दें कि नोमुरा का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7.2% के पूर्वानुमान से कम है.

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ग्रोथ रफ्तार पड़ी धीमी!

नोमुरा के मुताबिक FY2025 की दूसरी तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ दर घटकर 6.7 प्रतिशत रह सकती है, जो पिछली तिमाही के 7.8 फीसदी से कम है. यह आर्थिक ग्रोथ में धामेपन की मुख्य वजह चुनाव के समय सरकारी खर्च में कमी रही. जबकि प्राइवेट कंजप्शन और निश्चित निवेश ग्रोथ में इजाफा हुआ.

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ब्रोकरेज फर्म के एनलिस्ट्स ने ताजा नोट में लिखा कि भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ संभव है कि धीमी रहे. हालांकि, यह अस्थाई रहेगा. इकोनॉमिस्ट्स ने उम्मीद जताई है कि सरकारी खर्चे बढ़ने और महंगाई में गिरावट से आने वाले महीनों में ग्रोथ की रफ्तार में तेजी देखने को मिल सकती है.

नोट में ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि भले ही सरकारी खर्च में सुधार हो रहा हो, लेकिन कॉर्पोरेट प्रॉफिट में गिरावट और क्रेडिट ग्रोथ में नरमी जारी रहने की संभावना है, क्योंकि ग्रोथ धीमा रहेगा. बता दें कि गोल्डमैन सैक्स और जेपी मॉर्गन ने FY25 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा है.

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Q1 में GDP रफ्तार रही धीमी

Q1 में GDP ग्रोथ 5 तिमाहियों में सबसे निचले स्तर पर आ गई. FY25 की जून तिमाही में GDP ग्रोथ रेट 6.7 फीसदी रही, जोकि पिछली तिमाही में 7.8 फीसदी थी. RBI ने FY25 की पहली तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को 7.1 फीसदी कर दिया था. सालाना आधार पर GVA ग्रोथ 8.3 फीसदी से घटकर 6.8 फीसदी पर आ गई है. पिछली तिमाही में 6.3 फीसदी था.

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सकल घरेलू उत्पाद क्या है?

सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) किसी भी देश की आर्थिक गतिविधि का एक व्यापक माप है. यह किसी देश में एक निश्चित समय अवधि में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल वैल्यू को दर्शाता है. GDP को किसी देश की आर्थिक हेल्थ का एक व्यापक स्कोरकार्ड माना जाता है. इसका कैलकुलेशन प्रोडक्शन, खर्च, और इनकम से किया जाता है.

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RBI पॉलिसी पर ब्रोकरेज का नजरिया

नोमुरा का अनुमान है कि RBI के सख्त मैक्रोप्रूडेंशियल उपायों से क्रेडिट ग्रोथ में मंदी आ सकती है. महंगाई के दबाव में कमी और ग्रोथ में नरमी के साथ-साथ ग्लोबल रेट सायकल में बदलाव के साथ नोमुरा को उम्मीद है कि RBI अक्टूबर में अपनी पहली दर कटौती शुरू करेगा.