India GDP Growth Forecast 2025: दुनिया में मचे राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था लगातार तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। इस बीच भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है और यह खबर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने दी है। दरअसल, आईएमएफ की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.6% की दर से बढ़ सकती है। हालांकि, आईएमएफ ने यह भी कहा कि यह आंकड़ा अक्टूबर 2024 के टैरिफ-पूर्व अनुमान से 0.2 परसेंट प्वाइंट कम है।
अमेरिकी टैरिफ के असर को बेअसर करने वाली पहली तिमाही की मजबूत परफॉर्मेंस के बाद यह अनुमान लगाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत समेत कई देशों पर लगाए टैरिफ के बाद हुए समझौतों को ध्यान में रखकर IMF ने यह अपडेटेड अनुमान जारी किया है। IMF के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने चीन को पछाड़ दिया है और उससे आगे निकल गया है। चीन की अर्थव्यवस्था के 2025 में 4.8% की दर से बढ़ने का अनुमान है।
2026 के लिए विकास दर घटाया
आईएमएफ ने 2026 के लिए भारत का ग्रोथ अनुमान घटा दिया है। पहली तिमाही की रफ्तार में संभावित कमी का हवाला देते हुए इसे 6.2% कर दिया गया है। 2024-25 में भारतीय इकोनॉमी 6.5% (रीयल टर्म्स) की दर से बढ़ी थी। वहीं, एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने 2025-26 के लिए जीडीपी का अनुमान 6.3-6.8% पर स्थिर रखा है। बता दें कि भारत की अर्थव्यवस्था FY25 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। ये ग्रोथ तब है जब दुनिया भर में अनिश्चितता बढ़ रही है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए क्या है अनुमान
आईएमएफ का अनुमान है कि 2025 में ग्लोबल ग्रोथ 3.2% रहेगी, जो 2026 में थोड़ी घटकर 3.1% हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में महंगाई कम होने की उम्मीद है। हालांकि, यह अलग-अलग देशों में अलग-अलग होगी और अमेरिका में अभी भी टारगेट से ऊपर बनी हुई है।
अमेरिकी विकास दर की गति धीमी, स्पेन सबसे तेज
रिपोर्ट के मुताबिक, विकसित अर्थव्यवस्थाएं औसतन 1.6% की दर से बढ़ेंगी, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के 4.2% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। 2026 का अनुमान 0.2% की मंदी दिखाता है। आईएमएफ ने कहा कि अमेरिका 2025 में 1.9% की दर से बढ़ेगा, जो 2024 के 2.4% से कम है। वहीं, स्पेन 2.9% की ग्रोथ रेट के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली 'एडवांस्ड इकोनॉमी' होगा।
आईएमएफ ने दुनिया की इकोनॉमी की स्थिति पर कहा, 'ग्लोबल इकोनॉमी नई पॉलिसियों के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर रही है। बाद के डील्स और रीसेट के चलते ऊंचे टैरिफ की कुछ सख्ती कम हुई है, लेकिन कुल मिलाकर माहौल अस्थिर बना हुआ है। 2025 की पहली छमाही में एक्टिविटी को सपोर्ट करने वाले फ्रंट लोडिंग जैसे अस्थायी कारक अब खत्म हो रहे हैं।'
आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक अनिश्चितता, ज्यादा संरक्षणवाद, और लेबर सप्लाई के झटके ग्रोथ को कम कर सकते हैं। इसके अलावा, वित्तीय कमजोरियां, फाइनेंशियल मार्केट में संभावित करेक्शन, और संस्थानों का क्षरण स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
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