India Fiscal Deficit: इस वित्तीय वर्ष के पहले सात महीनों में अप्रैल से अक्टूबर तक भारत का राजकोषीय घाटा 8.037 लाख करोड़ रुपये रहा। जो वार्षिक अनुमान के 45% के बराबर माना जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल यह फिस्कल डेफिसिट 45.6 प्रतिशत था और इस साल मामूली बदलाव के बाद 45 प्रतिशत है।
क्या है फिस्कल डेफिसिट
आपको बताते चलें की राजकोषीय घाटा या फिस्कल डेफिसिट सरकार द्वारा किए गए खर्च की तुलना में उसकी आय में कमी होती है। किसी भी फिस्कल डेफिसिट का कैलकुलेशन जीडीपी की परसेंटेज या इनकम की तुलना में अधिक डॉलर खर्च किया जाना है।
इस वित्तीय वर्ष में भारत की टोटल रिसिप्ट 15.91 लाख करोड़ रुपये रहीं, जबकि अप्रैल से अक्टूबर में कुल खर्च 23.94 लाख करोड़ रुपये रहा। यह इस फिस्कल ईयर के बजट टारगेट का 58.6 प्रतिशत और 53.2 प्रतिशत था।
इस दौरान रिवेन्यू रिसिप्ट 15.67 लाख करोड़ रुपये रहीं, जिनमें टैक्स रिवेन्यू 13.02 लाख करोड़ रुपये और गैर-कर राजस्व यानी नॉन-टैक्स रिवेन्यू 2.66 लाख करोड़ रुपये था। इस दौरान टैक्स रिवेन्यू बजट के एस्टीमेट का 55.9 प्रतिशत और नॉन टैक्स रिवेन्यू 88.1 प्रतिशत रहा। बताते चलें कि पिछले फिस्कल ईयर में टैक्स रिवेन्यू, बजट अनुमान के 60.5 प्रतिशत से कम था वही नॉन टैक्स रिवेन्यू यानी गैर-कर राजस्व पिछले वर्ष की समान अवधि में बजट पूर्वानुमान के 66.3 प्रतिशत से बढ़ गया था।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा केंद्र सरकार को 87,416 करोड़ रुपए (सरप्लस) के ट्रांसफर की मंजूरी की वजह से नॉन रिवेन्यू टैक्स में उछाल आया है।
जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि राजस्व घाटा 2.80 लाख करोड़ रुपये या वित्तीय वर्ष के बजट लक्ष्य का 32.1 प्रतिशत था। इस फिस्कल ईयर के बजट की घोषणा के दौरान भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि भारत का लक्ष्य पिछले वित्त वर्ष के 6.4 प्रतिशत जीडीपी मुकाबले इस साल राजकोषीय अंतर को काम करके 5.9 प्रतिशत पर ले आना है।
राजकोषीय घाटा कम होने की अटकलें तेजी से बढ़ रही हैं,क्योंकि लोगों को लग रहा है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार, जो अगले साल लोकसभा चुनाव के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है। इसलिए वह जल्दी ही कई उपायों को लागू करेगी जिससे राजकोषीय घाटा तो काम होगा ही साथ ही महंगाई पर भी लगाम लग सकती है।
अगर खर्च की बात करें तो भारत सरकार करीब 2.23 लाख करोड़ रुपए खाद्य,पेट्रोलियम,खाद जैसी प्रमुख सब्सिडी में खर्च किया है। गौरतलब है कि यह संशोधित वार्षिक लक्ष्य का 62 प्रतिशत रहा, ये पिछले साल के अब तक के बजट में खर्च हुए 75 प्रतिशत से कम था। यानी आसान शब्दों में पिछले वर्ष वित्त वर्ष में भारत सरकार ने इन सभी सब्सिडी पर लगभग 75 प्रतिशत तक का खर्च किया था जो इस साल घटकर 62 प्रतिशत तक रह गया है।
आपको बताते चलें कि साल 2021-22 वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 15,91,089 करोड़ रुपए यानी जीडीपी का 6.9 फीसदी का टारगेट रखा था। लेकिन इस फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डिफिसिट 15,86,537 करोड़ रुपये रहा जो जीडीपी का 6.71 प्रतिशत था और बजट अनुमान से कम था।
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