रूस-यूक्रेन के बाद इजरायल-हमास और अब इजरायल-लेबनान, हिजबुल्लाह के साथ ईरान भी वॉर में शामिल हो गए हैं. दुनियाभर में जियो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से हथियारों की खरीद तेज हो गई है. हथियारों की भारी डिमांड के चलते उत्पादक देशों ने भी मौके को भुनाया है. भारत भी उन्हीं में से एक है, जिसने बीते फाइनेंशियल ईयर यानी FY24 में जमकर हथियार बेचे.

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भारत ने अमेरिका, फ्रांस समेत करीब 100 देशों को हथियारों की बिक्री की है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक रक्षा उपकरणों की बिक्री वित्त वर्ष 2023-24 में 21 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की रही, जोकि एक तरह से मील का पत्थर है. दरअसल में यह बदलाव भारत की रक्षा रणनीति में एक उल्लेखनीय बदलाव को दर्शाता है, जो इसकी बढ़ती क्षमताओं और इसके रक्षा उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग को उजागर करता है.

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अर्मेनिया ने जमकर खरीदे हथियार

अर्मेनिया एक प्रमुख खरीदार के रूप में उभरा है, जिसने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को काफी मजबूत किया है. अजरबैजान के साथ संघर्ष ने अर्मेनिया को भारत से उन्नत हथियार खरीदने के लिए प्रेरित किया, जिसमें आकाश वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली, पिनाका मल्टी-लॉन्च रॉकेट सिस्टम और 155 मिमी आर्टिलरी गन शामिल हैं.

पिछले चार सालों में भारतीय रक्षा प्रौद्योगिकी में आर्मेनिया के महत्वपूर्ण निवेश, विशेष रूप से नागोर्नो-काराबाख पर अज़रबैजान के साथ टकराव के दौरान, इन निर्यातों के रणनीतिक महत्व को और अधिक उजागर करते हैं. इन डील्स में मिसाइल सिस्टम, आर्टिलरी गन, रॉकेट सिस्टम और नाइट-विज़न उपकरण सहित तैयार उत्पादों की एक ब्रॉडर कैटेगरी शामिल है.

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डिफेंस इनोवेशन और साझेदारी

अर्मेनिया स्वदेशी रूप से विकसित आकाश वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का पहला अंतरराष्ट्रीय खरीदार बन गया है, जिसकी इंटरसेप्शन रेंज 25 किलोमीटर है. इसके अलावा ब्राजील ने आकाश सिस्टम में रुचि व्यक्त की है, जो भारत के रक्षा निर्यात बाजार के और विस्तार की संभावना को दर्शा रहा है.

एक ऐतिहासिक सौदे में भारत ने जनवरी 2022 में 3100 करोड़ रुपये (375 मिलियन डॉलर) से अधिक की कीमत पर फिलीपींस को तीन ब्रह्मोस एंटी-शिप तटीय मिसाइल बैटरियां निर्यात कीं. यह बिक्री न केवल भारत की रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करती है, बल्कि भारत और रूस द्वारा सह-विकसित सटीक-स्ट्राइक क्षमताओं को हासिल करने में अन्य आसियान और खाड़ी देशों की बढ़ती रुचि का मार्ग भी प्रशस्त करती है.

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रक्षा निर्यात में भारत की ग्लोबल पहुंच

भारतीय रक्षा निर्यात लगभग 100 देशों तक पहुँच गया है, जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के उत्पादों की ब्रॉडर रेंज शामिल हैं. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, डोर्नियर-228 विमान, पिनाका रॉकेट और बख्तरबंद वाहन जैसी हाई डिमांड आइटम शामिल हैं.

भारत से रक्षा उपकरण आयात करने वाले देशों की लिस्ट में यूएसए, फ्रांस और आर्मेनिया टॉप पर हैं. यह ट्रेंड न केवल भारत की रक्षा निर्यात रणनीति में बदलाव को दर्शाती है, बल्कि इन देशों द्वारा भारतीय रक्षा उत्पादों में दिए जाने वाले भरोसे और विश्वसनीयता को भी उजागर करती है. उदाहरण के लिए, हैदराबाद में टाटा बोइंग एयरोस्पेस इंडस्ट्री अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों के लिए बॉडी और पार्ट्स बनाता है, जो भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं की गहराई को दर्शाता है.