Income Tax Update 2025: केंद्र सरकार ने हाल ही में नया इनकम टैक्स बिल 2025 पेश किया है। इस बिल के लागू होने के बाद देशभर के मकान मालिकों को टैक्स को लेकर राहत मिलेगी। अब किराए की इनकम पर टैक्स का तरीका बदल जाएगा और मकान मालिकों को सिर्फ उस रकम पर टैक्स देना होगा, जो वास्तव में उनके पास बचती है।

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अब नेट एनुअल वैल्यू पर लगेगा टैक्स

पहले मकान मालिकों में यह आशंका थी कि उन्हें पूरे साल के किराए यानी ग्रॉस रेंट पर टैक्स देना होगा। इसका मतलब यह था कि किराए से जुड़े खर्च या नगर निगम को दिए गए टैक्स का कोई फायदा नहीं मिलेगा। लेकिन अब सरकार ने स्थिति साफ कर दी है।

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नए नियम के अनुसार, टैक्स सिर्फ नेट एनुअल वैल्यू (NAV) पर लगेगा। इसका मतलब है कि जो सालाना किराया मिला है, उसमें से नगर निगम को दिया गया टैक्स घटाकर जो रकम बचेगी, उसी पर टैक्स लगाया जाएगा।

उदाहरण: अगर किसी मकान से सालाना किराया 5 लाख रुपए मिलता है और मकान मालिक ने 50000 रुपए नगर निगम टैक्स चुकाया है, तो टैक्स केवल 4.5 लाख रुपए पर लगेगा।

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टैक्स कैलकुलेशन होगी और आसान

इससे पहले टैक्स को लेकर मकान मालिकों को कई तरह की दिक्कतें होती थीं। अब नियम आसान हो गए हैं। नेट रेंट की कैलकुलेशन के बाद मकान मालिकों को 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलेगा। यानी टैक्स देने से पहले नेट रेंट में से 30% घटा दिया जाएगा।

यह डिडक्शन इसलिए दिया जाता है ताकि मकान की मरम्मत देखभाल और बाकी छोटे-मोटे खर्चों को कवर किया जा सके। इसका सीधा फायदा यह होगा कि टैक्स योग्य रकम और भी कम हो जाएगी।

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होम लोन पर ब्याज की छूट

नए बिल में एक और राहत शामिल है। अगर किसी मकान मालिक ने उस प्रॉपर्टी पर होम लोन लिया है, तो उसका निर्माण से पहले का ब्याज (Pre-construction interest) भी टैक्स छूट के रूप में माना जाएगा।

पहले यह छूट केवल उस प्रॉपर्टी पर मिलती थी जिसमें मालिक खुद रहता था। लेकिन अब यह नियम किराए पर दी गई प्रॉपर्टी पर भी लागू होगा। इससे निवेश करने वाले मकान मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

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को-ओनर को मिलेगा अलग फायदा

अगर किसी प्रॉपर्टी का मालिक एक से ज्यादा लोग हैं, तो अब प्रत्येक मालिक को अलग-अलग टैक्स छूट मिलेगी। पहले को-ओनरशिप की स्थिति में टैक्स कैलकुलेशन काफी जटिल हो जाता था। नए बिल में इसे सरल बनाकर साफ नियम तय किए गए हैं।

मकान मालिकों के लिए खुशखबरी

नया इनकम टैक्स बिल मकान मालिकों के लिए एक पॉजिटिव बदलाव है। टैक्स अब सिर्फ नेट किराए पर लगेगा, 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा और होम लोन ब्याज पर भी छूट उपलब्ध होगी। इन प्रावधानों से न केवल टैक्स का बोझ घटेगा, बल्कि मकान को निवेश के रूप में रखना और भी फायदेमंद साबित होगा।