IMF Growth News: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चालू वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की ग्रोथ के अनुमान को 6.3 प्रतिशत तक कर दिया है। आईएमएफ ने अगले वित्त वर्ष के लिए भी अनुमानित ग्रोथ को समान रखा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी एक रिपोर्ट में कहां है कि मैक्रोइकोनॉमिक और वित्तीय स्थिरता से मिल रहे सपोर्ट के कारण यह ग्रोथ रेट मजबूत रहने की उम्मीद है। आपको बताते चले की आईएमएफ ने मध्यम अवधि के आर्थिक परिदृश्य की समीक्षा करने वाली अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्रमुख नीतिगत दरों में यथास्थिति बनाए रखते हुए अपनी मॉनिटरी पॉलिसी बैठक के दौरान भारत की अनुमानित जीडीपी ग्रोथ रेट को फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के लिए 50 बेसिस प्वाइंट के आधार पर बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। आपको बताते चलें कि अक्टूबर महीने में हुई बैठक के दौरान रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने भारत की जीडीपी ग्रोथ के 6.5 प्रतिशत तक रहने की बात कही है, और यही कारण है कि इस वित्त वर्ष की अनुमानित जीडीपी ग्रोथ रेट को पहले के मुकाबले बढ़ा दिया गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिजर्व बैंक आफ इंडिया द्वारा किया गया यह संशोधन भारत में जुलाई-सितंबर के फाइनेंशियल क्वार्टर में उम्मीद से अधिक वृद्धि 7.6 प्रतिशत की दर्ज करने के बाद आया है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का फाऊंडेशनल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत सरकारी बुनियादी ढांचा, अर्थव्यवस्था में तेजी को बरकरार रख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की विकास दर को बढ़ाने की क्षमता और भी ज्यादा बेहतर है। अगर भारत बड़े स्तर पर सुधार करके अगर लेबर और ह्युमन कैपिटल का सही इस्तेमाल करता है, तो आसानी से अपनी ग्रोथ रेट को बढ़ा सकता है।
गौरतलब है कि व्यापक वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद, अगले पांच वर्षों में भारत की ग्रोथ 6 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है। ऐसा निरंतर मजबूत निवेश, अभी भी बढ़ती निजी खपत और डिजीटाइजेशन की वजह से होने वाले प्रोडक्टिविटी गेन के कारण संभव हो सकता है।
वहीं महंगाई की बात करते हुए आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वहीं अगले वित्त वर्ष में महंगाई दर का अनुमान 4.6 प्रतिशत तक रखा गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक हेडलाइन इन्फ्लेशन धीरे-धीरे कम हो सकता है, हालांकि फूड प्राइस में आने वाले अचानक बदलाव से यह अस्थिर रह सकती है। बताते चलें कि घरेलू स्तर पर मौसम के कारण आने वाले अचानक बदलाव से महंगाई बढ़ सकती है और खाद्य निर्यात पर लगा हुआ प्रतिबंध और भी ज्यादा आगे बढ़ सकता है। आईएमएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि सब्जियों की कीमत के कारण आई महंगाई अस्थाई है और लंबे समय तक नहीं टिकेगी।
मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक के दौरान रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अगले क्वाटर में भी इन्फ्लेशन रेट के कंट्रोल रहने के आसार जताए हैं। जिसके मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 के चौथे क्वार्टर में महंगाई दर 5.2 प्रतिशत तक रह सकती है। वहीं अगले वित्त वर्ष के लिए सीपीआई महंगाई दर पहले क्वार्टर में 5.2 प्रतिशत, दूसरे क्वार्टर में 4 प्रतिशत, तीसरे क्वार्टर में 4.7 प्रतिशत तक रहने का अनुमान जताया गया है।
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