नई दिल्ली: देश के औद्योगिक उत्पादन में कमी का सिलसिला लगातार जारी है। आज यानि सोमवार को औद्योगिक उत्पादन से जुड़े हुए सितंबर महीने के आंकड़े आ गए हैं। सितंबर महीने में इंडस्ट्रीयल ग्रोथ 4.3 फीसदी घटी है, जबकि पिछले साल इस महीने इसमें वृद्धि हुई थी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल सितंबर महीने में आईआईपी यानी औद्योगिक उत्पादन 4.6 फीसदी बढ़ी थी। औद्योगिक ग्रोथ सितंबर महीने में 8 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक गिरावट की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का खराब प्रदर्शन रहा है।
जानकारी दें कि यह अक्टूबर 2011 के बाद से सबसे अधिक गिरावट है। ये आंकड़े अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं हैं। इससे पहले इस साल की दूसरी तिमारी में अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं इस साल की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 6 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। 26 महीने की गैप के बाद अगस्त में आईआईपी के आंकड़ों में 1.1 फीसदी की गिरावट हुई थी।
जबकि पिछले साल इसी महीने के मुकाबले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सितंबर 2019 में 23 में से 17 इंडस्ट्री ग्रुप की ग्रोथ निगेटिव रही है। इस महीने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की आउटपुट ग्रोथ - 3.9 फीसदी, खनन सेक्टर की -8.5 फीसदी, कैपिटल गुड्स की -20.7 फीसदी, इलेक्ट्रिकसिटी की -2.6 फीसदी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की -9.9 फीसदी, प्राइमरी आर्टिकल्स की -5.1 फीसदी आउटपुट ग्रोथ रही है।
वहीं बिजली और खनन क्षेत्र में खराब प्रदर्शन के कारण सितंबर महीने में औद्योगिक उत्पादन ज्यादा प्रभावित हुआ है। सिंतबर महीने में कोर सेक्टर में 5.2 फीसदी की गिरावट आई है, जो पिछले महीने यानी अगस्त में 0.5 फीसदी था। आंकड़ों के गिरने में बड़ी भूमिका कोयला खनन सेक्टर की है, जो 20.5 फीसदी गिरा है।
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