नई दिल्ली: अगर आपने भी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी से बीमा पॉलिसी ली है तो ये खबर आपके लिए खास है। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपने ग्राहकों के लिए कई इंश्योरेंस पॉलिसी मुहैया कराती है। जिसमें ग्राहक को कई बेनिफिट मिलते हैं। LIC की पेमेंट करें क्रेडिट कार्ड से, नहीं लगेगा कोई एक्सट्रा चार्ज ये भी पढ़ें
लेकिन कई बार कुछ ऐसी पॉलिसी होती हैं जिन्हें पॉलिसीधारक भूल जाते हैं। अगर आप भी कभी एलआईसी पॉलिसीधारक हैं या थे तो उसका आसानी से घर बैठे पता कर सकते हैं कि आपका भी कोई बकाया तो नहीं। लावारिस राशि या बकाया वो अमाउंट होता है जो पॉलिसीधारक की अचानक मृत्यु हो जाने पर, पॉलिसी का क्लेम ना करने से या क्षतिपूर्ति का दावा न करने से बीमा कंपनी के पास एकत्र हो जाती है।
एलआईसी अपने ग्राहकों को कई तरह की सुविधाएं देता है। इसके साथ ही एलआईसी अपने ग्राहकों को अपने बकाया दावों या उसके साथ बकाया राशि को चेक करने की सुविधा देता है। व्यक्ति अपने दावों की जानकारी एलआईसी की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। ग्राहकों को इसके लिए एलआईसी वेबसाइड पर जाकर पॉलिसी नंबर, पॉलिसीधारक का नाम, जन्म तिथि और पैन कार्ड नंबर की जानकारी देनी होगी। आपको बता दें कि पॉलिसी नंबर और पैन कार्ड नंबर ऑप्शनल हैं लेकिन पॉलिसी धारक का नाम और जन्म तिथि सबसे अहम जानकारी है। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि इसके बिना आप पता नहीं कर सकते।
- इसके लिए सबसे पहले एलआईसी की वेबसाइट के होम पेज पर जाएं।
- आपको पेज के सबसे नीचे वाले हिस्से में लिंक की तलाश करनी होगी।
- अगर आपको इसे खोजने में दिक्कत होती है तो होम पेज के दाएं कोने पर 'सर्च' टैब में अनक्लेम्ड अमाउंट टाइप करें।
- इसके बाद आप इस लिंक https://customer.onlinelic.in/LICEPS/portlets/visitor/unclaimedPolicyDues/UnclaimedPolicyDuesController.jpf पर क्लिक करें।
- अब अपनी डिटेल भर कर चेक करें।
- जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपको पता चले कि आपकी एलआईसी पॉलिसी में आपका भी कुछ लावारिस बीमा धन हैं, तो आप या लाभार्थी सीधे एलआईसी से संपर्क कर सकते हैं और राशि के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद कंपनी केवाईसी जैसी औपचारिकताएं पूरी कर लावारिस देय भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर देती है। आपको बता दें कि किसी भी धोखाधड़ी के दावों से बचने के लिए केवाईसी अनिवार्य है।
अक्सर इस तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में नॉमिनी को पता ही नहीं होता है। या फिर पॉलिसी डॉक्यूमेंट नहीं मिलते हैं। इस तरह पॉलिसीधारक की मौत होने पर आश्रित इस रकम पर दावा करने की स्थिति में नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए नॉमिनी को न केवल पॉलिसी के बारे में पता होना चाहिए, बल्कि उसे यह जानकारी भी होनी चाहिए कि पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज कहां रखे हैं। पॉलिसी में नॉमिनेशन को अपडेट कराना भी नहीं भूलना चाहिए।
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