नयी दिल्ली। बीते दिसंबर में सरकार की तरफ से टोल शुल्क चुकाने के लिए एक नये सिस्टम की शुरुआत की गयी। ये नया सिस्टम है फास्टैग, जो एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली है। ये आपको नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर उपलब्ध मिलेगा। इस खास किस्म के टैग को आपकी गाड़ी की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। फिर जब आप टोल से गुजरें तो वहां मौजूद सेंसर इसे रीड कर सकते हैं, जिससे आपका टोल चार्ज कट जायेगा। सरल भाषा में समझें तो टोल पर पर्ची कटवाने की जगह ये एक नया ई-सिस्टम है, जिसमें पहले से रिचार्ज करवा कर टोल भुगतान किया जा सकता है। इससे हाईवे पर फास्टैग लेन से गुजरनी वाली गाड़ी से ऑटोमैटिक ही टोल शुल्क कट जायेगा, जिससे टोल प्लाजा पर लगने वाला समय बचेगा। फास्टैग को पेटीएम जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से रीचार्ज करवाया जा सकता है। मगर एक स्थिति ऐसी भी जिसमें आप फास्टैग के जरिये बिना टोल चार्ज दिये जा सकते हैं।

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मशीन में हो गड़बड़ तो नहीं कटेगा चार्ज
बता दें कि अगर फास्टैग रीडिंग मशीन में कोई गड़बड़ हो और वो काम न कर रही हो तो आपको उस स्थिति में बिना टोल चार्ज का भुगतान किये गुजरने दिया जायेगा। साथ ही इसके लिए आपको शून्य ट्रांजेक्शन रसीद अनिवार्य रूप से जारी की जाएगी। मगर आपके पास वैध और फंक्शनल फास्टैग होना चाहिए और उसमें पर्याप्त बैलेंस भी होना चाहिए। हाइवे अथॉरिटो एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर 75 फीसदी लेनों को उन वाहनों के लिए खास तौर से रखा है, जिन पर फास्टैग हो। बता दें कि फास्टैग 15 जनवरी से राष्ट्रीय राजमार्गों का उपयोग करने वाले सभी गाड़ियों के लिए जरूरी हो जायेगा।

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कम समय में ही बना रिकॉर्ड
फास्टैग सिस्टम ने बेहद कम समय में रिकॉर्ड बना दिया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या एनएचएआई द्वारा जारी किये गये ताजा आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न पॉइंट ऑफ सेल से 1.15 करोड़ फास्टैग जारी किये जा चुके हैं। एनएचएआई के अनुसार रोजाना 1 लाख से अधिक फास्टैग जारी किये जा रहे हैं। एनएचएआई की तरफ से जारी किये गये एक बयान में बताया गया है कि फास्टैग के माध्यम से रोजाना 30 लाख से अधिक ट्रांजेक्शन हो रही हैं, जिससे प्रतिदिन का इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन 52 करोड़ रुपये के ऊपर पहुँच गया है।

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