नयी दिल्ली। एयर इंडिया की वित्तीय हालत नहीं सुधर रही। ऐसे में अगर कंपनी का कोई खरीदार नहीं मिला तो अगले 6 महीनों में सरकारी विमानन कंपनी को बंद करना पड़ेगा। एयर इंडिया के भविष्य को लेकर अनिश्चितता जारी है। एक अधिकारी ने कहा है कि बिना फंड मिले एयर इंडिया की 12 ग्राउंडेड नैरो बॉडी विमानों का संचालन भी फिर से शुरू करना मुश्किल होगा। बता दें कि एयर इंडिया पर करीब 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और सरकार अभी भी इसके विनिवेश के लिए तौर-तरीकों पर काम कर रही है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए अधिकारी के मुताबिक यदि जून 2020 तक कोई निवेशक एयर इंडिया में निवेश के लिए तैयार न हो तो इसका हश्र जेट एयरवेज जैसा हो सकता है। सरकार ने भी इसके निजीकरण की योजना के बीच कोई नयी पूँजी लगाने से हाथ खींच लिये और कर्ज में डूबी एयरलाइन को इसके हाल पर छोड़ दिया है।

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सरकार लगा चुकी है 30,520 करोड़ रुपये
सरकार के मुताबिक एयर इंडिया में 2011-12 से दिसंबर 2019 तक 30,520.21 करोड़ रुपये लगाये गये हैं। 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा पास किये गये प्रस्ताव के मुताबिक एयरलाइन को 10 सालों की अवधि में 30,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी थी। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि हमने परिचालन आवश्यकता को पूरा करने के लिए राशि का भुगतान करने के लिए 2,400 करोड़ रुपये की सोवरेन गारंटी मांगी थी, मगर सरकार ने केवल 500 करोड़ रुपये की गारंटी ही दी।

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जून तक संचालन की गुंजाइश
अधिकारी के मुताबिक हम जैसे-तैसे इस समय एयरलाइन को चलाये हुए हैं और जून तक इस स्थिति को बनाए रख सकते हैं। यदि कोई खरीदार उस समय तक नहीं आता है, तो हमें एयरलाइन बंद करनी होगी। बता दें कि 2018-19 में एयर इंडिया का घाटा करीब 8,556.35 करोड़ रुपये रहा था। सरकार जनवरी-मार्च तिमाही में एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचने के लिए आवेदन मांग सकती है।

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