हाल में सामने आए 590 करोड़ रुपए के विवाद के बाद IDFC First Bank ने अपने सुरक्षा ढांचे में अहम बदलाव किए हैं। बैंक का कहना है कि अब तय सीमा से ऊपर होने वाले हर बड़े ट्रांजैक्शन के लिए ग्राहक की स्पष्ट डिजिटल स्वीकृति लेना जरूरी होगा। इस कदम का उद्देश्य खातों से बिना अनुमति निकासी की संभावना को कम करना है।

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फोन कॉल से नहीं चलेगा काम

बैंक प्रबंधन ने साफ किया है कि अब केवल फोन पर हुई बातचीत के आधार पर हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन को मंजूरी नहीं दी जाएगी। पहले कुछ मामलों में कॉल पर पुष्टि के बाद भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ जाती थी।

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नई व्यवस्था के तहत ग्राहक को बैंक के आधिकारिक मोबाइल ऐप में लॉग-इन करना होगा और वहीं से ट्रांजैक्शन को डिजिटल तरीके से मंजूरी देनी होगी। यह मंजूरी तय समय के भीतर देनी जरूरी होगी, अन्यथा भुगतान रोका जा सकता है। बैंक का मानना है कि इस अतिरिक्त परत से फर्जी कॉल और पहचान की गलत पुष्टि जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी।

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AI तकनीक से निगरानी

सिर्फ डिजिटल मंजूरी ही नहीं, बैंक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम भी लागू करने की घोषणा की है। यह सिस्टम संदिग्ध लेन-देन और असामान्य गतिविधियों को तुरंत पहचान सकेगा।

अगर किसी खाते में असामान्य पैटर्न दिखता है, तो सिस्टम अलर्ट देगा। इसके बाद बैंक की टीम उस मामले की अलग से जांच करेगी। यानी पहले तकनीक की जांच और फिर मानवीय समीक्षा दोनों स्तर पर निगरानी होगी।

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बैंक के सीईओ V. Vaidyanathan ने कहा है कि हालिया घटनाओं से सीख लेते हुए बैंक अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को मजबूत बना रहा है।

क्या था पूरा मामला?

कुछ दिन पहले बैंक ने खुलासा किया था कि चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हरियाणा सरकार के खातों में लगभग 590 करोड़ रुपए का अंतर सामने आया। प्रारंभिक जांच में अनधिकृत लेन-देन की आशंका जताई गई।

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घटना के बाद हरियाणा सरकार ने बैंक को अपने पैनल से हटा दिया, जिससे करीब 200 करोड़ रुपए की निकासी हुई। मामले में चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। साथ ही स्वतंत्र जांच के लिए KPMG को नियुक्त किया गया है।

ग्राहकों के लिए क्या मतलब?

बैंक का कहना है कि यह बदलाव ग्राहकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम है। डिजिटल स्वीकृति और AI निगरानी से भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकेगा।

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विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल बैंकिंग के दौर में सुरक्षा उपायों को लगातार अपडेट करना जरूरी है। यह कदम ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने में अहम साबित हो सकता है।

590 करोड़ रुपए की घटना ने बैंक को अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का मौका दिया है। नए नियमों के साथ बैंकिंग लेन-देन अब और सुरक्षित हो सकते हैं। ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे अपने मोबाइल ऐप और संपर्क डिटेल अपडेट रखें, ताकि हर ट्रांजैक्शन की जानकारी समय पर मिल सके।