मुंबई: सोमवार, 3 अगस्त को सुबह 10:30 बजे जुलाई महीने के लिए HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI (PMI) के आंकड़े जारी होंगे। खास बात यह है कि ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक शुरू होने से ठीक पहले आ रहे हैं, जो 3 से 5 अगस्त तक चलेगी। बाजार की नजर ग्रोथ और कीमतों के संकेतों पर होगी, क्योंकि इनका सीधा असर रुपये, बॉन्ड और शेयर बाजार पर पड़ सकता है।

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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार में हाल के दिनों में थोड़ी सुस्ती देखी गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल में यह 54.7 था, जो मई में बढ़कर 55.0 हुआ, लेकिन जून में गिरकर 54.2 पर आ गया। जुलाई के 'फ्लैश' (शुरुआती) आंकड़े 53.9 रहे हैं, जो और सुस्ती का संकेत दे रहे हैं। बाजार को उम्मीद है कि फाइनल आंकड़े भी इसी के आसपास रहेंगे। हालांकि, इंडेक्स का 50 से ऊपर रहना विस्तार (expansion) दर्शाता है, इसलिए हेडलाइन नंबर से ज्यादा नजर कीमतों और भविष्य की दिशा पर रहेगी।

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HSBC India Manufacturing PMI: कब आएंगे आंकड़े और कहां रखें नजर?

जुलाई के फाइनल PMI आंकड़े सुबह 10:30 बजे तक एम्बार्गो (रोक) के तहत हैं और सबसे पहले S&P ग्लोबल के PMI पेज पर लाइव होंगे। इकोनॉमिक कैलेंडर पर भी ये इसी समय अपडेट होंगे, जहां ट्रेडर्स नए ऑर्डर, आउटपुट, नौकरियों, सप्लायर डिलीवरी और इन्वेंट्री जैसे डेटा को रियल-टाइम में ट्रैक कर सकेंगे। एल्गोरिदम-बेस्ड ट्रेडिंग (Algos) के दौर में ये चंद सेकंड काफी अहम साबित होते हैं।

HSBC India Manufacturing PMI: जून के मुकाबले जुलाई में क्या बदल सकता है?

जून में आई सुस्ती की मुख्य वजह नए ऑर्डर, एक्सपोर्ट, रोजगार और कारोबारी भरोसे में आई कमी थी। सर्वे के मुताबिक, "मार्च 2023 के बाद से अंतरराष्ट्रीय बिक्री में सबसे कम बढ़ोतरी दर्ज की गई।" कैपिटल गुड्स सेक्टर में गिरावट रही, जबकि कंज्यूमर और इंटरमीडिएट गुड्स की स्थिति बेहतर थी। जुलाई के फ्लैश आंकड़े (53.9) फाइनल डेटा आने से पहले सावधानी बरतने का इशारा कर रहे हैं। अब सबकी नजर कीमतों के पैमाने और नौकरियों के आंकड़ों पर टिकी है।

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महीनाहेडलाइन PMIमुख्य बातें
अप्रैल 202654.7मार्च के निचले स्तर से रिकवरी; इनपुट लागत में बढ़ोतरी।
मई 202655.0घरेलू ऑर्डर मजबूत; स्टॉक जमा करने पर जोर।
जून 202654.2एक्सपोर्ट 39 महीने के निचले स्तर पर; नौकरियों में सुस्ती।
जुलाई 2026 (फ्लैश)53.9फाइनल आंकड़ों में और मामूली गिरावट की उम्मीद।

HSBC India Manufacturing PMI और RBI MPC: क्यों है यह डेटा इतना अहम?

3 से 5 अगस्त तक चलने वाली MPC बैठक के बीच, ट्रेडर्स PMI के जरिए महंगाई के जोखिम और ब्याज दरों पर मिलने वाले संकेतों को समझने की कोशिश करेंगे। रॉयटर्स के एक पोल के मुताबिक, इस बार भी ब्याज दरों को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा जा सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि वैश्विक स्तर के मुकाबले भारत में कीमतों की रफ्तार कम हो रही है, जो दरों को स्थिर रखने के फैसले को मजबूती देता है।

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HSBC India Manufacturing PMI: रुपये, बॉन्ड और निफ्टी पर क्या होगा असर?

सुबह 10:30 बजे अगर PMI आंकड़े कमजोर रहते हैं और आउटपुट कीमतें कम होती हैं, तो इससे रुपये (USD/INR) में नरमी आ सकती है और 10 साल की बॉन्ड यील्ड घट सकती है। वहीं, अगर ग्रोथ और कीमतें दोनों उम्मीद से ज्यादा रहती हैं, तो यील्ड बढ़ सकती है और शेयर बाजार पर दबाव दिख सकता है। बैंक निफ्टी के लिए मार्जिन पर दबाव के बिना विस्तार (expansion) बेहतर रहता है। इस हफ्ते रुपये और बॉन्ड के लिए कच्चे तेल की कीमतें भी एक बड़ा फैक्टर रहेंगी।