stock market may rise by 10 percent by 2024 elections: देश में अब चुनाव का माहौल बनने लगा है। पहले कुछ राज्यों में चुनाव हैं, फिर अगले साल मई तक लोकसभा के चुनाव पूरे होने हैं। ऐसे में इसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई पड़ना शुरू हो सकता है। इस बारे में शेयर बाजार के जानकारा और विदेशी ब्रोकरेज कंपनियां अपनी राय रखने लगी हैं। आइये जानते हैं कि इनकी ऐसे में शेयर बाजार को लेकर क्या राय है।

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मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि भारत में जब भी चुनाव नजदीक आते हैं तो लोग आशावादी नजर आते हैं। ऐसा इस बार भी दिख रहा है। विदेशी ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मई 2024 तक भारत के शेयर बाजार में 10 प्रतिशत की तेजी आ सकती है। हालांकि चुनाव के परिणाम कैसे आते हैं, इस आधार पर बाद में शेयर बाजार अपनी दिशा तय करेगा।

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दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनाव में मतदान अप्रैल 2024 में शुरू होने की संभावना है। वहीं मई के अंत में एक ही दिन में गिनती और नतीजे जारी होने की उम्मीद है। मॉर्गन स्टैनली के अनुसार हालांकि लगता है कि चुनाव थोड़ा पहले भी हो सकते हैं। मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव की तारीख थोड़ा पहले होती है तो शेयर बाजार की चाल छोटी अवधि के लिए केंद्रित रह सकती है।

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मॉर्गन स्टैनली के अनुसार अगर हम चुनाव पूर्व शेयर बाजार की चाल के बारे में सही हैं, तो चुनाव परिणाम के आधार पर, हमारा मानना ​​है कि बाजार में 5 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक निगेटिव रैली रह सकती है। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार चुनाव के बाद देश में भारी उतार-चढ़ाव की ऐतिहासिक मिसाल हैं। लेकिन मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि हमें लगता है कि इस बार यह उतार चढ़ाव और ज्यादा रह सकता है।

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विदेशी ब्रोकरेज मॉर्गन स्टैनली ने बताया है कि 2004 में चुनाव नतीजे शेयर बाजार उम्मीद के विपरीत थे, ऐसे में एक ही कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 17 फीसदी गिर गया था।

मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि यदि I.N.D.I.A. चुनाव से पहले एक अच्छा समझौता और सीट शेयरिंग एग्रीमेंट कर लेता है तो भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ अच्छी प्रतिस्पर्धा हो सकती है। ऐसे में शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद कम हो जाएगी, जैसा पहले अनुमान जताया गया है।

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कुल मिलाकर, मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि घरेलू विकास मजबूत रहेगा, लेकिन वैश्विक मंदी एक जोखिम है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि अमेरिकी शेयरों के साथ भारतीय शेयर बाजार के संबंध में गिरावट आई है, लेकिन अमेरिकी शेयरों में कोई भी तेज गिरावट (या वृद्धि) भारत के शेयर बाजार को प्रभावित करेगी।

वहीं प्रभुदास लीलाधर की तरफ से 21 अगस्त को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है "हम उम्मीद करते हैं कि नवंबर में कुछ राज्यों में चुनाव और अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनावों के साथ चुनाव संबंधी गतिविधियां तेज होने के कारण शेयर बाजार राजनीतिक जोखिमों को ध्यान में रखना शुरू कर देगा। अर्थव्यवस्था में केंद्र सरकार की तरफ से पूंजीगत व्यय से बड़ा सहारा मिल रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों भी अच्छा प्रदर्शन दिख रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में अपेक्षित ब्याज दर में बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति जोखिम के साथ रुपया/डॉलर पर इसका प्रभाव और पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।

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चुनाव के बढ़ते देश के चलते जानकारों का सुझाव है कि निवेशक खास स्टॉक पर नजर रखें, न कि सेक्टर पर। इन जानकारों का सुझाव है कि इक्विटी में धीरे धीरे अगले तीन से छह महीनों में थोड़ा थोड़ा करके निवेश किया जा सकता है। हालांकि जानकारों की राय है कि अगर निफ्टी 19,000 अंक के स्तर पर आ जाए तो एकमुश्त निवेश भी किया जा सकता है।

शेयर बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निवेशक एसआईपी के माध्यम से आवंटन बढ़ा सकते हैं या बाजार में करेक्शन दिखे तो निवेश कर सकते हैं। वहीं मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड में निवेश को बढ़ाया जा सकता है।