Business Idea: हर कोई हमेशा ऐसे बिजनेस आइडिया के तलाश में रहता है जिसमें घाटा लगने के चांस बहुत कम रहे। अगर आप भी ऐसे ही बिजनेस की तलाश में हैं तो आज हम आपको एक ऐसे बिजनेस आइडिया के बारे में बताएंगे जिसमें घाटा लगने का चांस कम होता है। बाजार में इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है। यह हर मौसम में लोगों की पसंद बना रहता है। हर उम्र के लोग इसे खाना पसंद करते हैं। इस प्रॉडक्ट की डिमांड गांवो और शहरों में हमेशा समान रुप से बनी रहती है। आज हम आपको काजू की खेती (Cashew Farming) के बारे में बताएंगे।

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पूरे देश में है काजू की लोकप्रियता

काजू को सूखे मेवे के भी लोग जानते हैं। काजू का फल पेड़ पर उगता है। इसके पेड़ की लंबाई 14 मीटर से लेकर 15 मीटर या उससे भी ज्यादा हो सकती है। पौधे लगाने के टाइम से फल देने में इसके पौधे लगभग 3 साल का सयम लेते हैं। काजू के अलावा इसके छिलके भी बिकते हैं। काजू के छिलकों से पेंट और लुब्रिकेंट का बनाया जाता है।

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काजू की खेती होती है फायदेमंद

व्यवासयिक नजरिए से काजू की खेती काफी लाभदायक मानी जाती है। काजू के पौधे के लिए गर्म जलवायु अच्छा माना जाता है। पौधे को उगाने के लिए समान्य तामपमान 20 से 35 डिग्री के बीच उपयुक्त होता है। काजू के पौधे की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे किसी भी तापमान पर उगाया जा सकता है। जानकारों के मुताबिक लाल बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए थोड़ी ज्यादा उपयुक्त होती है।

कहां होती है काजू की खेती

पूरे विश्व में काजू के कुल उत्पादन का 25 फीसदी हिस्सा भारत में उगाया जाता है। काजू की खेती केरल, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तामिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल राज्य में की जाती है। झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी काजू की खेती की जाती है।

क्या है कमाई का आकड़ा

काजू के पौधे को केवल एक बार लगाना होता है, इसके बाद इससे कई सालो तक फल आते रहते हैं। काजू का पौध लगान के लिए कोई खास खर्च नहीं लगता है। जानकारों के अनुसार एक हेक्टेयर भूमी में 500 पौधे लगाए जा सकते हैं। किसानों की माने तो एक पेड़ से 20 किलो तक काजू उपजता है। इस हिसाब से एक हेक्टेयर में 10 टन काजू का उत्पादन होगा। बाजार में काजू 1200 रुपये किलो के आसपास बिक रहा है।