Bank : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को निर्देश किया है कि वे ऐसे अकाउंट की जांच करें। जिन अकाउंट में 10 साल से ज्यादा समय से ग्राहक के द्वारा कोई लेनदेन नहीं किया गया है। नियमों के मुताबिक, बैंक ऐसे अकाउंट में जमा राशि को डिपोजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीईएएफ) में ट्रांसफर करने के लिए बाध्य है।

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फाइनेंशियल स्टेबिलिटी एंड डेवलपमेंट की 7वीं बैठक के दौरान वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेगुलेटर से कहा है कि वे फाइनेंशियल क्षेत्र में बैकिंग जमा, म्यूचुअल फंड, शेयर और लाभांश में क्लेम न किए गए डिपॉजिट और क्लेम के निपटारे की सुविधा के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाए।

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आरबीआई ने 100 दिनों के अंदर देश के प्रत्येक जिले में हर एक बैंक से टॉप 100 अनक्लेम्ड डिपॉजिट को पता लगाने और भुगतान करने के लिए बैंकों को प्रोत्साहित करने के लिए एक अभियान शुरू किया है इस अभियान का नाम 100 दिन 100 भुगतान है।

यह कार्यवाही आरबीआई के द्वारा बैंकिंग प्रणाली में क्लेम न की गई जमा राशियों की राशि को कम करने का समर्थन करेगा। इसके साथ ही उन राशियों को उनके मालिक के या दावेदारों को लौटाने के लगातार कोशिश का समर्थन करेगी।

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व्यक्ति संबंधित बैंक की अधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते है और क्लेम न की गई जमा रहस्यों को खोजने के लिए लिंक को खोज सकते है। अगर आप जमा के बारे में जानकारी चाहते है तो फिर इसके लिए आपको कुछ जरूरी जानकारी को दर्ज करना होगा।

अगर आप डीईएएफ से क्लेम न की गई जमा राशि से रुपयों को क्लेम करना चाहते है, तो फिर इसके लिए अकाउंट होल्डर को उस बैंक की ब्रांच में जाना होगा। जहां पर उनका अकाउंट है।

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बैंक जाकर अकाउंट होल्डर को क्लेम फॉर्म लेना होगा इस फॉर्म को पूरी तरह से सही सही भरना होगा।

सिटीबैंक इंडिया की वेबसाइट के मुताबिक, व्यक्ति इन कुछ जरूरी डाक्यूमेंट को मेल या कूरियर कर सकते हैं। जैसे आपके अकाउंट नंबर का उल्लेख करते हुए, शेष बची हुई राशि वापस करने के लिए सिग्नेचर किया हुआ अनुरोध पत्र, पासपोर्ट की फोटोकॉपी सिग्नेचर की हुई, मैलिंग एड्रेस प्रूफ की फोटोकॉपी सिग्चर की हुई।

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बैंक की वेबसाइट के मुताबिक, मेलिंग एड्रेस प्रूफ के रूप में एक्सेप्ट किए जाने वाले डाक्यूमेंट की बात करें, तो फिर इसमें वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, नरेगा कार्ड, आधार कार्ड का उपयोग कर सकते है।

इसके साथ ही आपको इसके लिए कुछ बातों का ध्यान देना बेहद जरूरी होता है जैसे आप अनुरोध पत्र में अपना पूरा अकाउंट नंबर को दर्ज करे। इसके साथ ही सभी ज्वाइंट अकाउंट होल्डर को सेल्फ अटेस्टेड डाक्यूमेंट को पेश किए जाने चाहिए।

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अगर कोई अकाउंट होल्डर अवयस्क है, तो फिर वह अपने अभिभावक के लिए डाक्यूमेंट भी जमा करे। इसके साथ ही डाक्यूमेंट में जो सिग्नेचर है वह सिग्नेचर बैंक के मौजूदा रिकॉर्ड से मेल खाना चाहिए।

इसके साथ ही अगर आपका डाक का एड्रेस बदल गया है, तो फिर आप इसको अपने अनुरोध पर इंगित करे। इसके साथ ही पता का प्रमाण डाक्यूमेंट जमा करें।

इसके साथ ही अगर आपके अकाउंट को किसी भी वजह से बंद किया गया है, तो फिर आप उस अकाउंट का डिटेल्स को शामिल करे। जिसमें पैसे ट्रांसफर किए जाने चाहिए यानी अकाउंट नंबर, अकाउंट नाम, बैंक का नाम और आईएफएससी कोड अन्यथा निर्दिष्ट पते पर एक डिमांड ड्राफ्ट जारी किया जाएगा। आपने जो एड्रेस प्रूफ दिया है।

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एक बात बेहद ही ध्यान रखने वाली है कि ट्रांसफर केवल अकाउंट होल्डर के अकाउंट में किया जायेगा।