भारत में 2017 में लागू हुआ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) समय-समय पर छोटे बदलावों से गुजरा है। लेकिन इस बार पहली बार बड़े स्तर पर स्ट्रक्चरल बदलाव किए गए हैं। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में अहम फैसले लिए गए हैं, जो देश की टैक्स प्रणाली को और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अब सिर्फ दो सामान्य स्लैब
TV9 की रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ने 22 सितंबर से लागू होने वाले बदलावों में मौजूदा चार टैक्स स्लैब को घटाकर सिर्फ दो कर दिया है। अब ज्यादातर वस्तुएं और सेवाएं 5% और 18% वाले स्लैब में आएंगी। इस कदम से टैक्स स्ट्रक्चर आसान हो जाएगा और ग्राहकों को भी स्पष्टता मिलेगी कि किस चीज़ पर कितना टैक्स देना है।
लग्जरी और 'सिन प्रोडक्ट्स' पर अलग टैक्स
काउंसिल ने यह भी साफ किया है कि तंबाकू, शराब और अन्य 'सिन प्रोडक्ट्स' के साथ लग्जरी आइटम्स के लिए एक विशेष टैक्स स्लैब रखा जाएगा। इस पर टैक्स दर अधिकतम 40% तक हो सकती है। इससे सरकार को रेवेन्यू में मदद मिलेगी और साथ ही इन वस्तुओं पर नियंत्रण भी रहेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से जीएसटी ढांचे को आसान बनाने की मांग उठ रही थी। चार स्लैब होने से आम उपभोक्ता और कारोबारियों को दिक्कत आती थी। कई बार उत्पाद या सेवा किस स्लैब में आती है, इसे लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती थी। दो स्लैब होने से न केवल टैक्स प्रणाली आसान होगी बल्कि अनुपालन (compliance) भी आसान होगा।
कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर असर
कारोबारियों के लिए: टैक्स रेट तय करने में आसानी होगी और कागजी कामकाज घटेगा।
उपभोक्ताओं के लिए: ज्यादातर उत्पादों पर टैक्स दरों में ज्यादा बदलाव नहीं होगा, लेकिन कुछ वस्तुएं अब सस्ती या महंगी हो सकती हैं।
सरकार के लिए: टैक्स संग्रहण ज्यादा पारदर्शी होगा और चोरी रोकने में मदद मिलेगी।
आगे की राह
अब देखने वाली बात यह होगी कि नए ढांचे के लागू होने के बाद मार्केट पर कैसा असर पड़ता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह कदम लंबी अवधि में अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा साबित होगा और टैक्स व्यवस्था को स्थिरता मिलेगी।
जीएसटी में यह बदलाव आम लोगों और कारोबारियों दोनों के लिए राहत और सरलता लेकर आने वाला है। 22 सितंबर से शुरू होने वाला यह नया टैक्स स्ट्रक्चर भारत की टैक्स प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार माना जा रहा है।
पहले दिन कौन-कौनसे बड़े फैसले लिए गए?
1. ऑटोमैटिक जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया पर सहमति बनी।
2. निर्यातकों के लिए रजिस्ट्रेशन का समय 1 महीने से घटाकर 3 दिन कर दिया गया।
3. 2500 रुपए तक के कपड़े और फुटवियर पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया। पहले 1,000 रुपए से ऊपर के सामान पर 12% टैक्स लगता था।
4. रोजमर्रा की चीजों जैसे पनीर, खाखरा, चपाती, साबुन, टूथपेस्ट और शैंपू पर टैक्स घटाकर 18% से 5% या 0% करने पर चर्चा हुई।
5. हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर भी राहत देने पर विचार हुआ। 5 लाख तक के कवरेज वाले हेल्थ पॉलिसी और टर्म इंश्योरेंस पर पूरी छूट की संभावना है।
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