Heatwaves : देश में वर्ष 2022 में लंबे वक्त तक परेशान करने वाली गर्मी वापस आ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने देश में कई सारे हिस्सों के लिए हीटवेव की जारी करते हुए आने वाले हफ्ते में काफी गर्म दिनों की भविष्यवाणी की है।

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इस साल गर्मियों में अधिक वक्त तक चलने वाले लू के वजह से ऐसे क्षेत्रों पर काफी नकारात्मक रूप से असर पड़ सकता है जो आर्थिक विकास में योगदान करते हैं लेकिन किस तरह से हीटवेव अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं, तो आइए जानते हैं इसके बारे में।

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देश में पिछले कुछ वर्षों में हीटवेव की स्थिति काफी खराब हो गई है। अगर हम इसकी स्थिति की बात करें, तो फिर यह पिछले साल काफी खराब थी। देश में जब वर्ष 2012 की तुलना में दोगुना हीटवेव दिनों का अनुभव किया।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी एक आदेश के मुताबिक, हीटवेव दिनों की औसत संख्या वर्ष 2022 में 10 वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गई। बढ़ते तापमान ने न केवल गर्मियों के दिनों को असहनीय बना दिया है। बल्कि इसने सालों में आर्थिक विकास में भी काफी असर डाला है।

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संगठनों की एक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी द्वारा संकलित 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश को वर्ष 2021 में अधिक गर्मी के वजह से सेवा, कृषि और निर्माण क्षेत्रों में लगभग 159 बिलियन अमरीकी डालर की आय का नुकसान हुआ है।

इसी बीच, वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि अधिक गर्मी और आर्द्रता की स्थिति की वजह से सिर्फ खुल हुए श्रम घंटों से भारत को वर्ष 2030 तल 2.5 से 4.5 फीसदी की जीडीपी की हानि होगी।

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वही, इसने यह भी संकेत दिया है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद का 40 फीसदी गर्मी के संपर्क में आने वाले कार्य पर निर्भर है। इससे 7 वर्षों में 3.4 करोड़ नौकरी का नुकसान हो सकता है।

यह केवल श्रम बल उत्पादकता पर गर्मी की लहरों का प्रभाव है। बढ़ते तापमान के वजह से बेहद जरूरी कृषि पर भी समान रूप से विनाशकारी प्रभाव पड़ता है। जिस बजाय से अधिक समय तक उच्च मुद्रास्फीति हो सकती है।

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देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि और कृषि क्षेत्र लगभग 14 प्रतिशत का योगदान करते है। यह विकास को संतुलित करने के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते है। देश की 50 फीसदी से ज्यादा आबादी अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर है।