देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक ने विभिन्न आधारों के लिए 10 आधार अंकों (bps) तक की अपनी सीमांत लागत आधारित उधार दर (MCLR) में कटौती की। बैंक की वेबसाइट के अनुसार, इसने 6 महीने की MCLR को 5 बीपीएस से 8.1 प्रतिशत, 1 साल की दर को 5 बीपीएस से 8.3 प्रतिशत, 2 साल की 5 बीपीएस से 8.4 प्रतिशत और 3 साल की दर में 10 बीपीएस से 8.5 प्रतिशत की कटौती की है। ये नई दरें 7 नवंबर यानी आज से लागू होंगी। फिलहाल, बैंक ने ओवरनाइट, एक महीने और तीन महीने के एमसीएलआर में कोई परिवर्तन नहीं किया है।

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आखिरी बार एचडीएफसी बैंक ने अगस्त में एमसीएलआर दरों में कटौती की थी। उस समय इसने 10 बीपीएस द्वारा सभी टेनर्स की दरों में कटौती की थी। वर्ष की शुरुआत के बाद से, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कुल 135 बीपीएस के लिए रेपो दर में लगातार पांच बार कटौती की है। अब बैंक भी, ऋण पर ब्याज दर में कटौती कर रहे हैं, भले ही उसी दर पर न हो।

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सेंट्रल बैंक ने रेपो रेट में कटौती के बाद सभी बैंकों से कहा है कि वह कटौती का लाभ तुरंत ग्राहकों को दें। दरअसल, आरबीआई को ऐसी शिकायत मिली थीं कि बैंक रेपो रेट में कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं।

ट्रांसमिशन तेजी से दिखाई दे, इसके लिए केंद्रीय बैंक ने बैंकों को बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी ब्याज दर की व्यवस्था को अपनाने के लिए कहा है। सभी सरकारी बैंकों के लिए एक अक्टूबर से बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी ब्याज दर की व्यवस्था लागू करना अनिवार्य हो गया है। वे नए फ्लोटिंग रेट लोन इसी व्यवस्था के तहत करेंगे।

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आपको बता दें कि एमसीएलआर वह दर होती है जिस पर किसी बैंक से मिलने वाले ब्याज की दर तय होती है। इससे कम दर पर देश का कोई भी बैंक लोन नहीं दे सकता है, सामान्य भाषा में यह आधार दर ही होती है। आपको बता दें कि इसके पहले भी कई बैंकों ने लोन पर मिलने वाली ब्‍याज दरों में कटौती की है।