भारत के जुलाई महीने के GST कलेक्शन के आंकड़े आज यानी शनिवार, 1 अगस्त 2026 की सुबह जारी होने वाले हैं। जैसे ही आधिकारिक आंकड़े आएंगे, हम इस लाइव ट्रैकर में आपको हेडलाइन नंबर, राज्यों के ट्रेंड और मार्केट के लिए जरूरी संकेतों की पल-पल की जानकारी देंगे। नीचे दिए गए डेटा और टेबल की मदद से आप खुद समझ पाएंगे कि देश की आर्थिक रफ्तार कैसी है।

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वित्त मंत्रालय हर महीने PIB (प्रेस सूचना ब्यूरो) के जरिए GST डेटा जारी करता है। इसमें ग्रॉस, नेट और राज्यों के हिसाब से अलग-अलग आंकड़े दिए जाते हैं। आधिकारिक प्रेस नोट के लिए PIB पोर्टल के वित्त मंत्रालय वाले पेज पर नजर रखें। आज का अपडेट भी पिछले महीनों के फॉर्मेट में ही आने की उम्मीद है।

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GST कलेक्शन: महीने-दर-महीने और सालाना आधार पर क्या है स्थिति?

जून में ग्रॉस GST कलेक्शन करीब ₹1.95 लाख करोड़ रहा था, जो पिछले साल के मुकाबले 13.9 प्रतिशत ज्यादा था। मई में यह आंकड़ा ₹1.94 लाख करोड़ था, यानी जून में मामूली बढ़त दिखी थी। वहीं, पिछले साल जुलाई में कलेक्शन ₹1.96 लाख करोड़ के करीब रहा था। आज के आंकड़ों को समझने के लिए ये पुराने आंकड़े एक बेंचमार्क की तरह काम करेंगे और बताएंगे कि इकोनॉमी में कितनी मजबूती है।

राज्यों का GST कलेक्शन: जुलाई 2025 के आंकड़ों पर एक नजर

जब तक जुलाई 2026 के राज्यों के आंकड़े नहीं आ जाते, तब तक पिछले साल के आंकड़े एक अच्छा रेफरेंस पॉइंट हैं। पिछले साल महाराष्ट्र कलेक्शन के मामले में सबसे आगे था, जिसके बाद कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु का नंबर था। आज की लिस्ट आने पर आप देख पाएंगे कि घरेलू मांग किन राज्यों में बढ़ रही है और कहां सुस्ती है।

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राज्यग्रॉस GST (₹ करोड़)सालाना बदलाव
महाराष्ट्र30,590+6%
कर्नाटक13,967+7%
गुजरात11,358+3%
तमिलनाडु11,296+8%

ई-वे बिल के संकेत और मार्केट पर इसका असर

जून में ई-वे बिल जनरेशन सालाना आधार पर 14.5 प्रतिशत बढ़कर करीब 13.68 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले चार महीनों में सबसे ज्यादा है। यह जुलाई में सामानों की मजबूत आवाजाही का संकेत है। इसके अलावा, GSTN ने ई-वे बिल में कुछ बदलावों की भी जानकारी दी है, जिसमें 'Ship-To GSTIN' अनिवार्य करना और क्लोजर फीचर शामिल है, जो 1 अगस्त 2026 से लागू हो रहे हैं।

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ये आंकड़े अभी क्यों अहम हैं? दरअसल, 3 से 5 अगस्त 2026 तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक होने वाली है। GST कलेक्शन में मजबूती से सरकार के खजाने की स्थिति बेहतर होती है, जिससे बॉन्ड मार्केट की चिंताएं कम हो सकती हैं। इसका सीधा असर शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड यील्ड पर पड़ता है। ट्रेडर्स आज इस बात पर नजर रखेंगे कि कलेक्शन में घरेलू मांग का कितना हाथ है और इम्पोर्ट का कितना।