सरकार ज्वैलरी निर्यात को बढ़ाने के लिए गोल्ड पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है। जी हां वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी की ओर से यह जानकारी दी गई है कि सरकार एक इंटीग्रेटिड गोल्ड पॉलिसी बनाने पर काम कर रही है और इसके जल्द जारी किए जाने की संभावना है। गोल्ड पॉलिसी को पीली धातु उद्योग और ज्वैलरी निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है।
मनी भास्कर की रिर्पोट के अनुसार वित्त मंत्रालय में डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स में संयुक्त सचिव सुरेंद्र पाल सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि नीति आयोग ने गोल्ड पॉलिसी पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट की समीक्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर निश्चित तौर पर विचार कर रही है। निश्चित रूप से यह एक जीबी पॉलिसी होगी। वर्तमान में भारत इस कीमती धातु का सबसे बड़ा उपभोक्ता और आयातक देश है। इसके बावजूद देश में कोई गोल्ड पॉलिसी नहीं है।
आपको बता दें कि सोने के आयात पर 12.5 प्रतिशत की इंपोर्ट ड्यूटी लग रही है। ज्वैलरी इंडस्ट्री सोने पर लग रही इस ड्यूटी में कटौती की मांग कर रही है। उद्योग का कहना है कि इंपोर्ट ड्यूटी को 12.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत किया जाएगा। उद्योग का दावा है कि इंपोर्ट ड्यूटी में वृद्धि के कारण कई कारोबार भारत से बाहर चले गए हैं।
तो वहीं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की मांग को लेकर सरकार जेम्स एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश छोड़कर चले गए कारोबारियों को वापस लाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने इस सेक्टर की प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए कारोबारियों से डिजिटल ट्रांजेक्शन जैसी सभी लीगल प्रैक्टिस अपनाने को कहा।
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