नई दिल्ली, जून 28। कुछ सरकारी बैंकों को प्राइवेट करने पर लंबे समय से बात चल रही है। मगर नयी जानकारी के अनुसार सरकार का प्लान सभी सरकारी बैंकों (पीएसबी) का निजीकरण करने की है। यदि ये प्लान पूरा होता है तो एक भी बैंक सरकारी नहीं रहेगा। बता दें कि सरकार का प्लान सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन की सुविधा के लिए नियमों में संशोधन करने का है। इसके लिए सरकार संसद के आगामी मॉनसून सत्र में एक विधेयक पेश करेगी। आगे जानिए बाकी प्लानिंग।
विचाराधीन संशोधनों में से एक के जरिए केंद्र सरकार बैंकों का निजीकरण करेगी और उनसे पूरी तरह बाहर निकल जाएगी। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार की एक अधिकारी ने ऐसा कहा है। मालूम हो कि बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण) अधिनियम, 1970 के तहत केंद्र सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कम से कम 51% हिस्सेदारी रखने की आवश्यकता है। पहले सरकार का प्लान निजीकरण के दौरान बैंकों में कम से कम 26 फीसदी हिस्सेदारी बरकरार रखने का था। इसे धीरे-धीरे और कम करने का भी था।
एक अन्य अधिकारी के अनुसार ये बिल एक इनेबल्ड मैकेनिज्म प्रोवाइड करेगा। सरकार इसे अगले सत्र में ला सकती है और फिर अन्य मुद्दों को सुलझाने पर काम किया जा सकता है। यह बदलाव आईडीबीआई बैंक के संभावित निवेशकों के साथ हालिया चर्चा पर आधारित है। बता दें कि सरकार आईडीबीआई बैंक की बिक्री करने के लिए काफी समय से प्लान बना रही है।
इस मसले पर वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ बातचीत कर रहा है। आरबीआई बैंकिंग क्षेत्र का नियामक है। इसलिए निजीकरण से संबंधित हिस्सेदारी के स्वामित्व और नियंत्रण के मुद्दों पर भी चर्चा चल रही है। वर्तमान में प्रमोटर निजी बैंकों में अधिकतम 26 फीसदी हिस्सेदारी रख सकते हैं। बताते चलें कि संसद के मानसून सत्र की तारीखों की घोषणा अभी नहीं की गई है।
सरकार ने 22 दिसंबर, 2021 को पूरे हुए संसद के शीतकालीन सत्र में बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक, 2021 को लिस्ट किया था। लेकिन ये संशोधन कानून पेश नहीं किया गया। बिल में 'बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 और 1980 में संशोधन और बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में आकस्मिक संशोधन' का प्रस्ताव था।
अप्रैल 2021 में नीति आयोग ने विनिवेश विभाग को जिन बैंकों का निजीकरण किया जाना चाहिए, उन पर अपनी सिफारिशें दी थीं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को इस लिस्ट में शामिल किया गया था। लेकिन अहम बात यह है कि इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, तब से लेकर अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है। मगर इतना जरूर है कि आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रोसेस पहले से ही चल रही है। बैंक को कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत शुरू किया गया था और इसके निजीकरण के लिए कानूनी संशोधन की आवश्यकता नहीं है। सरकार जल्द ही इस बैंक को बेचने के लिए निवेशकों से एक्सप्रेशंस ऑफ इंटेरेस्ट मांग सकती है।
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