नयी दिल्ली। अगली बार जब आप किसी ज्वेलर के पास जाने का सोचें तो आपको कुछ खास डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी। वरना आप गोल्ड ज्वेलरी नहीं खरीद पाएंगे। आपको सोना खरीदने के लिए पैन और आधार जैसे नो योर कस्टमर (केवाईसी) डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी। असल में ज्वेलरों ने 2 लाख रु से कम का सोना खरीदने के मामले में इन डॉक्यूमेंट्स की मांग करना शुरू कर दी है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि केवल 10 लाख रु से अधिक की ज्वेलरी के लिए ही केवाईसी जरूरी होगा।
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ज्वेलर्स को डर है कि अगर इस सेक्टर के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) लागू होने के बाद कोई संदिग्ध लेनदेन नजर आया तो सरकारी एजेंसियां उन पर शिकंजा कस सकती हैं। उन्हें कार्रवाई का डर है। इस समय सोने को छोड़ कर बाकी सभी संपत्ति वर्गों में किसी भी लेनदेन के लिए केवाईसी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।
सोने के मामले में यदि आप 2 लाख रुपये या उससे अधिक की खरीदारी करते हैं तो आपको केवाईसी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता होती है। सरकार स्टॉक, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट के बराबर ही सोने को एसेट क्लास बनाने की कोशिश कर रही है। सरकार इस कीमती धातु को एसेट क्लास के रूप में डेवलप करने के लिए एक गोल्ड पॉलिसी लाने की योजना बना रही है। इसका मलतब है कि सोने के लिए अब स्पष्ट रूप से 'अघोषित खजाने' के रूप में दावा नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे उचित निवेश और लक्जरी होल्डिंग के रूप में पेश करना होगा। भारत में सालाना 800-850 टन सोने की खपत होती है।
पीएमएलए के तहत कीमती धातु और कीमती पत्थरों में डीलर्स को नोटिफाई करने से सोने, चांदी, प्लेटिनम, हीरे और कीमती पत्थरों में डील करने वाली ज्वेलर्स फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट को रिपोर्ट करने वाली इकाई बन गए हैं। गोल्ड ट्रेड 28 दिसंबर को पीएमएलए के दायरे में लाया गया था। जानकार कहते हैं कि ज्वेलर्स को सरकार के अधिकारियों को सभी संदिग्ध लेनदेन की सूचना देनी होगी।
यह एक आम बात है कि कोई व्यक्ति परिवार के सदस्यों के नाम पर 2 लाख रुपये से कम का सोना खरीदता है ताकि वे पकड़े न जाएं। लेकिन ज्वेलर्स को अब लग रहा है कि सरकारी एजेंसियां और सख्त हो गई हैं और वे उन पर शिकंजा कसने के लिए सभी लेन-देन के डिटेल पर नजर रख रही हैं। अगर अधिकारियों को लेनदेन में किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलती है तो ज्वेलर गिरफ्तार हो सकता है।
इंडस्ट्री से जुड़े एक जानकार कहते हैं कि कई ज्वेलर्स ने ग्राहकों से केवाईसी पूछना शुरू कर दिया है और इससे कंफ्यूजन की स्थिति पैदा हो गई है क्योंकि ग्राहक ज्वेलर्स के साथ केवाईसी डिटेल साझा करने को तैयार नहीं हैं।
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