नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने जनता और बैंकों को नये साल से पहले बड़ी राहत दी है। केंद्रीय बजट से पहले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी पीएसबी के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई एक समीक्षा बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने व्यापारी छूट दर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क को समाप्त करने की घोषणा की। जनवरी से 50 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक कारोबार वाले सभी कारोबारियों को रुपे डेबिट कार्ड और यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से बिना मर्चेंट डिस्काउंट रेट या एमडीआर शुल्क के भुगतान की सुविधा प्रदान करना जरूरी होगा। जब कोई उपभोक्ता व्यापारी के पॉइंट-ऑफ-सेल्स (PoS) टर्मिनल पर अपना कार्ड स्वाइप करता है तो व्यापारी अपने सर्विस प्रोवाइडर को जो शुल्क अदा करता है उसे ही एमडीआर कहते हैं। मगर व्यापारी भी यह शुल्क ग्राहकों से वसूलते हैं। दुकानदार या व्यापारी द्वारा वसूले गये एमडीआर का बड़ा हिस्सा उन बैंकों को जाता है, जो क्रेडिट या डेबिट कार्ड जारी करते हैं।

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जितना ज्यादा एमडीआर उतनी अधिक वसूली
आपको बता दें कि एमडीआर जितना अधिक होता है दुकानदान भी अपने ग्राहकों से उतना ही अधिक शुल्क वसूलते हैं। सरकार के नये फैसले से साफ है कि कार्ड या यूपीआई के जरिये पेमेंट करने पर आपकी जेब पर पड़ने वाला बोझ कम होगा। दुकानदार एमडीआर हटने से यह शुल्क ग्राहकों से भी नहीं वसूलेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने 5 जुलाई 2019 को अपने पहले बजट में इसके संकेत दिये थे। मगर अब भी क्रेडिट कार्ड पर एमडीआर शुल्क 0-2 फीसदी के बीच रह सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने बैंकों को भी राहत दी है।

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बैंकों के मामले में सीबीआई का दखल नहीं
वित्त मंत्री की बैंकों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में एक और फैसला लिया गया है। अब बैंकों से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसी या सीबीआई दखल नहीं देगी। अब बैंकों की इजाजत के बिना बैंकिंग का कोई मामला सीबीआई के पास नहीं जायेगा। केंद्र सरकार के इस फैसले से बैंकों को राहत मिलेगी। मगर यह भी कहा गया है कि अब बैंकों को मिलने वाली शिकायतों पर तेज कार्रवाई करनी होगी।

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