नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने अनुमान लगाया है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वित्त वर्ष 2020-21 में 7.7 फीसदी की गिरावट आ सकती है। जबकि पिछले वित्त वर्ष में देश की जीडीपी में 4.2 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गयी थी। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि के आंकड़े अभी आने हैं। मगर जुलाई-सितंबर तिमाही में अर्थव्यवस्था में 7.5 फीसदी की गिरावट के बाद भारत में तकनीकी तौर पर मंदी आ गयी है। असल में जुलाई-सितंबर तिमाही से पहले अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी में 23.9 फीसदी की रिकॉर्ड गिरावट आई थी। लगातार दो तिमाहियों में जीडीपी में गिरावट के कारण देश तकनीक मंदी में है।

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क्या है आरबीआई का अनुमान
केंद्र सरकार का जीडीपी में 7.7 फीसदी की गिरावट का अनुमान भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) से अधिक है। आरबीआई ने दिसंबर में कहा था कि 2020-21 में वास्तविक जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट आ सकती है। हालांकि आरबीआई ने इसके पहले जीडीपी में 9.5 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया था। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने राष्ट्रीय आय के अपने पहले एडवांस अनुमानों में कहा कि वास्तविक जीडीपी के 134.40 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है, जबकि वर्ष 2019-20 के लिए प्रोविजनल अनुमान के अनुसार जीडीपी 145.66 लाख करोड़ रुपये रही।

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वर्ल्ड बैंक को ज्यादा गिरावट का अनुमान
विश्व बैंक द्वारा वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी में 9.6 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया गया है। इसके एक दिन बाद ही केंद्र सरकार ने जीडीपी के अपने अनुमान जारी किए हैं। विश्व बैंक ने अपनी ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स की रिपोर्ट में कहा कि भारत उस समय महामारी की चपेट में आया था जब उसकी अर्थव्यवस्था में पहले से ही गिरावट दिख रही थी। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राष्ट्रीय आय के दूसरा अग्रिम अनुमान और अक्टूबर-दिसंबर 2020 की तिमाही के लिए जीडीपी का अनुमान (2020-21 की तीसरी तिमाही) 26 फरवरी को जारी किए जाएंगे।

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