नई दिल्ली, अक्टूबर 6। यूनियन कैबिनेट ने बुधवार को सात नए मेगा टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना को मंजूरी दी। यह कदम कपड़ा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने और हजारों रोजगार पैदा करने में मदद करेगा। इस कदम के पीछे सरकार का मकसद टेक्सटाइल सेक्टर में भारत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना भी है। यूनियन कैबिनेट ने अगले पांच वर्षों में सात मेगा इंटीग्रेटेड टेक्ससाइल रीजन और एपेरल पार्क (पीएम-मित्रा) के निर्माण के लिए कुल 4,445 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी।
निर्यात और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार के मेगा प्लांट की एक झलक साझा करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कहा कि इंटीग्रेटेड पार्क विभिन्न राज्यों (जो इस प्रोजेक्ट में भाग लेने के इच्छुक हैं) में स्थित ग्रीनफील्ड या ब्राउनफील्ड साइटों पर होंगे। ग्रीनफील्ड साइटों में पीएम-मित्र के कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने के लिए, केंद्र सरकार 500 करोड़ रु तक या परियोजना लागत का 30 प्रतिशत, जो भी उच्चतम हो, की पूंजी सहायता प्रदान करेगी।
ब्राउनफील्ड साइटों के लिए असेसमेंट के बाद सपोर्ट राशि लागत के 30 प्रतिशत और 200 करोड़ रुपये तक सीमित है। परियोजना को प्राइवेट सेक्टर के लिए आकर्षक बनाने का उद्देश्य है। इसके साथ ही सरकार कपड़ा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को जल्दी स्थापित करने के लिए हर पार्क के लिए 300 करोड़ रुपये का भी सपोर्ट करेगी। इसका भुगतान पीएम-मित्रा में एक नई स्थापित इकाई के टर्नओवर के 3 प्रतिशत तक किया जाएगा।
बजट 2021 में घोषित मेगा टेक्सटाइल पार्कों में परिवहन घाटे को कम करने के लिए इंटीग्रेटेड सुविधाएं और क्विक टर्नअराउंड टाइम होगा। केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि यह भारत को पूरी तरह से इंटीग्रेटेड विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग और कपड़ा क्षेत्र के निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
पीएम-मित्र पार्कों में एक ऊष्मायन केंद्र और प्लग-एंड-प्ले सुविधा, डेवलप्ड फैक्ट्री साइट, सड़कें, बिजली, पानी और अपशिष्ट-जल प्रणाली, कॉमन प्रोसेसिंग हाउस और सीईटीपी सुविधाएं होंगी। इनमें डिजाइन केंद्र और परीक्षण केंद्र भी होंगे। इसके इनमें श्रमिकों के होस्टल्स और आवास, रसद पार्क, गोदाम, चिकित्सा, प्रशिक्षण और श्रमिकों के लिए कौशल विकास सुविधाएं भी होंगी। मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन और टेक्सटाइल पार्क शुद्ध विनिर्माण गतिविधि के लिए 50 प्रतिशत क्षेत्र, उपयोगिताओं के लिए 20 प्रतिशत क्षेत्र और वाणिज्यिक विकास के लिए 10 प्रतिशत क्षेत्र डेवलप करेंगे।
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