नयी दिल्ली। केंद्र सरकार एयर इंडिया को बेचने के लिए हर कोशिश कर रही है। अब इसी कोशिश में यूनियन कैबिनेट ने एनआरआई भारतीयों को एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की अनुमति दे दी है। वर्तमान में एयर इंडिया में एफडीआई (विदेशी निवेश) 49 फीसदी है। अनिवासी भारतीयों द्वारा 100 फीसदी निवेश से एसओईसी नियमों का उल्लंघन नहीं होगा क्योंकि इसे घरेलू निवेश के रूप में माना जाएगा। ऐसे में एनआरआई निवेशक ऑटोमेटिक रूट से ही एयर इंडिया में निवेश कर सकेंगे। कैबिनेट की बैठक में लिये गये फैसलों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि भारत वैश्विक निवेश के लिए बेहतर विकल्प बना हुआ है। बता दें कि वैश्विक स्तर पर एयरलाइन उद्योग को पर्याप्त स्वामित्व और प्रभावी नियंत्रण (एसओईसी) नियमों के तहत ही नियंत्रित किया जाता है। एयर इंडिया के लिए 17 मार्च तक बोली लगाई जा सकती है।

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पहले नहीं मिली सरकार को कामयाबी
बता दें कि एयर इंडिया को बेचने के लिए सरकार की यह पहली कोशिश नहीं है। सरकार पहले भी इसे बेचने के नाकाम प्रयास कर चुकी है। एयर इंडिया के लिए रणनीतिक विनिवेश योजना के तहत, सरकार का इरादा एयर इंडिया की 100 प्रतिशत, इसकी एक इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस में 100 प्रतिशत और जॉइंट वेंचर एआई-एसएटीएस 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है। हालांकि अभी तक सरकार को कोई ठोस बोली लगाने वाला नहीं मिला है।

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2018 में की थी सरकार ने पहली कोशिश
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने एयर इंडिया को बेचने की पहली कोशिश 2018 में की थी। मगर उस समय सरकार एयर इंडिया की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती थी। हालांकि सरकार को कामयाबी नहीं मिली थी। एयर इंडिया पर इस समय करीब 80,000 करोड़ का लोन है। हालांकि नयी विनिवेश योजना के तहत सफल बोलीदाता को केवल 23,286.5 करोड़ रुपये का लोन लेना होगा। वहीं वित्त वर्ष 2018-19 में एयर इंडिया 8,556 करोड़ रुपये के घाटे में रही थी। इसके बाद 7 जनवरी 2020 को गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने इसके निजीकरण के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी।
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