GoodRetruns Poll: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रीक समीक्षा कमिटी यानी MPC की मीटिंग जारी है. अक्टूबर पॉलिसी में ब्याज दरें घटने की संभावनाएं हैं. RBI ने अप्रैल 2023 से रेपो दर को 6.5% पर स्थिर रखा है. बता दें कि दरों में यह स्थिरता वैश्विक स्तर पर समान आर्थिक चुनौतियों और मिडिल-ईस्ट में चल रहे तनावों के बीच आई.

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RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) से उम्मीद है कि वह 9 अक्टूबर, 2024 को अपनी बैठक के दौरान दरों को इसी स्तर पर बनाए रखेगी, जो कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाई गई दर कटौती के रास्ते से अलग है. ब्याज दरों पर संभावित फैसले को लेकर GoodReturns.In ने 36 इकोनॉमिस्ट्स के साथ एक पोल किया है. इसमें ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स को उम्मीद है कि लगातार दसवीं बार ब्याज दरें स्थिर रह सकती हैं.

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किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर?

ब्याज दरों को कम करने की दिशा में वैश्विक झुकाव के बावजूद, आरबीआई के निर्णय लेने की प्रक्रिया बाहरी प्रभावों के बजाय महंगाई और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे डॉमेस्टिक फैक्टर्स पर होने की संभावना है. भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति जुलाई और अगस्त 2024 में 4% से नीचे दर्ज की गई थी. इसके अलावा FY25 की पहली तिमाही के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ आरबीआई के अनुमानों को पूरा नहीं कर पाई, जिससे आने वाले समय में ब्याज दरें घटने के संकेत मिल रहे.

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नए सदस्यों से क्या हैं उम्मीदें?

एमपीसी की मीटिंग 7 अक्टूबर से शुरू हुई है. इससे पहले कमिटी में तीन नए सदस्यों की एंट्री हुई है, जो भविष्य की मौद्रिक नीतियों को आकार देने वाले नए नजरिया पेश कर सकते हैं. नए सदस्यों की पहली बैठक होने के बावजूद इनसे मौजूदा रेपो दर को बनाए रखने के लिए वोट करने की उम्मीद है. साथ ही दिसंबर की बैठक के लिए नीति में ढील की उम्मीदें मजबूत हो रही हैं. एनलिस्ट्स का अनुमान है कि दिसंबर 2024 में 25 बेसिस पॉइंट्स की दर में कटौती होगी, उसके बाद फरवरी 2025 में समान कटौती होगी. इससे संभावित रूप से रेपो दर 6% तक कम हो जाएगी.

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मौद्रिक नीति में आगे घट सकती हैं दरें

2025 में आगे चलकर, RBI अतिरिक्त दर कटौती लागू कर सकता है, जिसमें दो से चार एडजस्टमेंट्स की कमेंट्री हो सकती है, जो कुल मिलाकर 50 से 100 bps के बीच हो सकते हैं. एमपीसी से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वह अपने विचार-विमर्श में ग्लोबल इकोनॉमिक कंडिशंस को भी ध्यान में रखेगी. इसमें विकसित देशों में मुद्रास्फीति के रुझान और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं शामिल हैं. इजरायल, हिजबुल्लाह और हमास के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल ऑयल प्राइसेज और महंगाई पर उनके संभावित प्रभावों के बारे में चिंताओं को बढ़ा दिया है, जो बदले में आरबीआई के नीतिगत निर्णयों को प्रभावित कर सकता है.

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दरों को स्थिर रखेगा RBI

रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखने के साथ-साथ स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर और सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर को क्रमशः 6.25% और 6.75% पर अपरिवर्तित रखने में आरबीआई की दृढ़ता वैश्विक आर्थिक स्थितियों और घरेलू आर्थिक संकेतकों में उतार-चढ़ाव के बीच एक सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाती है. इस सतर्क रुख को विकास, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के जटिल परस्पर क्रिया को ध्यान में रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय आर्थिक वातावरण द्वारा उत्पन्न विभिन्न चुनौतियों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है.

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(पूजा जैसवार के इनपुट के साथ)