नयी दिल्ली। ऑपरेशनल आवश्यकताओं और समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाया को चुकाने के लिए वोडाफोन पीएलसी वोडाफोन आइडिया में कुछ नई पूंजी का निवेश कर सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वोडाफोन आइडिया वोडाफोन ग्रुप और आदित्य बिड़ला समूह के बीच एक जॉइंट वेंचर (जेवी) कंपनी है। वोडाफोन के साथ ही आदित्य बिड़ला ग्रुप भी वोडाफोन आइडिया को डूबने से बचाने के लिए इसमें निवेश कर सकता है। वोडाफोन ग्रुप वोडाफोन आइडिया में 20-22.5 करोड़ डॉलर और आदित्य बिड़ला समूह 12.5-15 करोड़ डॉलर तक निवेश कर सकता है। इन दोनों समूहों की तरफ से ये निवेश प्रेफेरेंस कैपिटल या रिडीमेबल प्रेफेरेंस शेयरों के जरिए किया जा सकता है।

आदित्य बिड़ला ग्रुप ऐसे करेगा निवेश

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार आदित्य बिड़ला ग्रुप के अधिकतर फंड इसके चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला की प्राइवेट इकाइयों के जरिए किये जाने की संभावना है। बता दें कि वोडाफोन आइडिया पर दूरसंचार विभाग के अनुमान के मुताबिक 58,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया एजीआर है, जिसमें से कंपनी ने कुछ हिस्सा चुका दिया है। बता दें कि वोडाफोन की तरफ से पिछले साल से कई बार सरकार की तरफ से एजीआर मामले में राहत न मिलने पर कंपनी बंद करने के संकेत दिए जा चुके हैं।

क्या होता है एजीआर चार्ज

एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू या एजीआर एक यूसेज और लाइसेंस शुल्क होता है, जो दूरसंचार विभाग टेलीकॉम कंपनियों से लेता है। इस पर विवाद भी रहा है। दूरसंचार विभाग कहता आया है कि एजीआर की गणना किसी टेलीकॉम कंपनी को जमा ब्याज या संपत्ति बेचने सहित होने वाली कुल आय पर होनी चाहिए। मगर टेलीकॉम कंपनियाँ सिर्फ टेलीकॉम सर्विसेज इनकम पर एजीआर की गणना करने की बात कहती हैं। 2005 में सेलुलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस परिभाषा का विरोध करते हुए TDSAT का रुख किया था, मगर TDSAT ने सभी तरह की इनकम पर एजीआर की गणना को सही माना था। फिर सुप्रीम कोर्ट ने भी इस परिभाषा को सही माना।

वोडाफोन पर एजीआर का बहुत दबाव

बता दें कि टेलीकॉम सेक्टर के जानकार कई बार कह चुके हैं कि वोडाफोन आइडिया की वित्तीय स्थिति तीन प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में सबसे नाजुक है। एजीआर के कारण वोडाफोन कई बार अपना कारोबार समेटने का संकेत दे चुकी है। अगर वोडाफोन अपना कारोबार बंद करती है तो बाजार में सिर्फ बड़ी प्राइवेट कंपनियां रह जायेंगी यानी कि भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो। वैसे सरकार ने कई बार टेलीकॉम सेक्टर में तीनों कंपनियों को बरकरार रखने की बात कही है। गौरतलब है कि लॉकडाउन के कारण लोग घरों से ही काम कर रहे हैं। ऐसे में टेलीकॉम सेवाओं को जारी और एक्टिवेट बनाये रखना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी बन गयी है। इसलिए दूरसंचार विभाग ने एजीआर बकाया संबंधित मामलों को अस्थायी रूप से साइड कर दिया है। जिससे टेलीकॉम कंपनियों को थोड़ी राहत मिली है।

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