नयी दिल्ली। अर्थव्यवस्था में चल रही सुस्ती के बीच सरकार के लिए एक अच्छी खबर आयी है। दरअसल बीते दिसंबर में देश में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी देखने को मिली। एक प्राइवेट बिजनेस सर्वे के मुताबिक दिसंबर में भारत का विनिर्माण उद्योग यानी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री दस महीनों में अपनी सबसे तेज़ दर से बढ़ी। सर्वे के अनुसार फैक्ट्री उत्पादन में जोरदार ग्रोथ से उत्पादन वृद्धि को बढ़ावा मिला। इससे आईएचएस मार्किट इंडिया का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) दिसंबर में बढ़ कर 52.7 हो गया, जो नवंबर में 51.2 फीसदी रहा था। यह मई के बाद सबसे ऊँचा स्तर है। साथ ही लगातार 20वां महीना रहा जिसमें पीएमआई सूचकां 50 के स्तर से अधिक रहा।

Advertisement

इन सेक्टरों के चलते बेहतर नतीजे
सब-सेक्टर स्तर पर कंज्यूमर गुड्स में ग्रोथ से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां तेज हुईं। मगर इस बीच कैपिटल गुड्स की ग्रोथ में गिरावट आयी। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर मांग में बढ़ोतरी से बिक्री में इजाफा हुआ है। नये निर्यात ऑर्डर में भी लगातार 26वें महीने में हल्की ही सही मगर बढ़ोतरी दर्ज की गयी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीएमआई सूचकांक का 50 से ऊपर होना ग्रोथ का सूचक है, वहीं 50 से नीचे का लेवल संकुचन का संकेत है। सरकार द्वारा 7 जनवरी को 2019-20 के लिए आर्थिक विकास के पहले अग्रिम अनुमानों को जारी करने से पहले यह सर्वे आया है।

Advertisement

नौकरियों में हुआ इजाफा
सर्वे में बताया गया है कि सुस्त पड़ी मांग में वृद्धि से सामान निर्माता नौकरी देने के प्रयासों में दिसंबर में तेजी लाये हैं। हालांकि साल 2019 के आखिर में कारोबार के मामले में कंपनियों का आत्मविश्वास लगभग 3 सालों के सबसे निचले स्तर पर रहा। दरअसल यह बाजार के हालात को लेकर सामने आयी चिंताओं को ही दिखाता है। सर्वे के अनुसार अगले 12 महीनों में उत्पादन बढ़ सकता है। वहीं मुद्रास्फीति दर पिछले 13 महीनों में सबसे अधिक हो गयी है।

Advertisement

यह भी पढ़ें - पीएम किसान योजना : प्रधानमंत्री ने 6 करोड़ किसानों को दिये 12,000 करोड़ रुपये