नयी दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई सहित बाकी बैंक उन होम लोन के पुनर्गठन (Restructuring) विकल्पों पर काम कर रहे हैं, जहां लोन की अवधि 2 साल से ज्यादा नहीं बढ़ी है। इस अवधि में पुनर्भुगतान शेड्यूल में मिली राहत वाले महीने भी शामिल होंगे। इन विकल्पों में उन मामलों में कुछ महीनों तक के लिए ईएमआई टालना शामिल है, जिनमें लोन लेने वालों की कोरोना संकट में पूरी इनकम का नुकसान हुआ है। वे कर्जदार जिनकी कोरोना महामारी के दौरान सैलेरी घटी है उन्हें स्टेप-अप ईएमआई का ऑप्शन दिया जाएगा। ऐसे लोगों से 2 साल तक कम ईएमआई ली जाएगी और फिर उसमें समय के साथ बढ़ोतरी होगी।
केवी कामत कमेटी रिटेल और होम लोन पुनर्गठन मामलों को नहीं देखेगी। एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय संकट का सामना कर रहे कर्जदारों की संख्या को आधार बना कर बैंक खुद से एक प्रस्ताव तैयार करेंगे। इस प्रस्ताव को सितंबर में बोर्ड के पास भेज दिया जाएगा। वास्तव में बैंक इस समय स्वयं लोन का पुनर्गठन करना चाहते हैं। क्योंकि इससे डिफॉल्टर्स और एनपीए नहीं बढ़ेंगे। बैंक ये भी मानते हैं कि ये समय कर्जदारों से सख्ती से पैसा वसलूने या संपत्ति जब्त करने का नहीं है। वैसे आरबीआई ने सभी बैंकों को 2 साल तक के लिए लोन अवधि बढ़ाने की अनुमति दी है। मगर बैंकों ने कहा है कि वे इतने समय तक के लिए लोन पर मोहलत नहीं दे सकते।
यदि किसी ने 15 साल की अवधि के लिए लोन लिया है और उसने आरबीआई की तरफ से मिली 6 महीनों की मोहलत का लाभ लिया है उसकी लोन अवधि में वैसे ही 14 महीनों का इजाफा हो जाएगा। इसका मतलब है कि ज्यादातर बैंक कुछ महीनों के लिए ही ईएमआई पर मोहलत दे सकते हैं। सटीक छूट उस ब्याज दर पर निर्भर करेगी जो उधारकर्ता भुगतान कर रहा होगा। इस समय होम लोन की दरें 7% से नीचे आ गई हैं, बैंकों का कहना है कि पुनर्गठित लोन पर अपनी बेस्ट ब्याज दरें प्रदान करना मुश्किल होगा क्योंकि बैंकों को पुनर्गठन लोन पर 10 फीसदी का अतिरिक्त प्रोविजन बनाना होगा।
आरबीआई द्वारा नियुक्ति की गई कामत कमेटी के सितंबर के मध्य तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की उम्मीद है। बैंकरों को उम्मीद है कि ये समिति पुनर्गठन के लिए विभिन्न मापदंडों सामने रखेगी जिनमें अधिकतम डेब्ट-इक्विटी अनुपात की अनुमति दी जाएगी। कमेटी यह भी तय करेगी कि किन परिस्थितियों में डेब्ट को इक्विटी में परिवर्तित किया जा सकता है। इसके अलावा प्रत्येक पर्सनल कॉर्पोरेट लोन, जहां बैंक एक्सपोजर 1,500 करोड़ रुपये से अधिक हो, पुनर्गठन पर विचार करने के लिए समिति द्वारा समीक्षा की जाएगी।
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