Gold Silver Crash 2026: पिछले एक महीने में सोना और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जून की शुरुआत में जहां सोना करीब 1.69 लाख रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था, वहीं जुलाई की शुरुआत तक यह लगभग 1.40 लाख रुपये तक फिसल गया। इसी तरह चांदी में भी करीब 17-18% की गिरावट देखने को मिली। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बुलियन का गोल्डन दौर खत्म हो गया है या यह लंबी तेजी से पहले का एक बड़ा करेक्शन है?

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कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट रेनिशा चनानी का मानना है कि फिलहाल बाजार में कमजोरी जरूर है, लेकिन यह लंबी अवधि के बुल मार्केट का अंत नहीं है।

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क्यों आई Gold Silver में इतनी बड़ी गिरावट?

रेनिशा चनानी के अनुसार, सोने और चांदी पर फिलहाल कई वैश्विक कारकों का दबाव बना हुआ है। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें हैं। साल की शुरुआत में जहां बाजार को रेट कट की उम्मीद थी, वहीं अब सितंबर से आगे कई रेट हाइक की संभावना जताई जा रही है। ऊंची ब्याज दरें डॉलर को मजबूत बनाती हैं, जिससे सोने जैसी सुरक्षित निवेश संपत्तियों पर दबाव बढ़ जाता है।

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इसके अलावा, अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक महंगाई को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रही है। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि इन सभी नकारात्मक कारकों का असर काफी हद तक कीमतों में शामिल हो चुका है।

क्या अभी और गिर सकते हैं Gold Silver?

एक्सपर्ट का मानना है कि शॉर्ट टर्म में अभी भी कुछ और कमजोरी देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक सोने में मौजूदा स्तर से 5-10% और गिरावट संभव है, जबकि चांदी में 15-20% तक का अतिरिक्त करेक्शन देखने को मिल सकता है।

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हालांकि, वह इसे निवेशकों के लिए डरने की नहीं बल्कि अवसर की स्थिति मानती हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्तरों पर जोखिम सीमित है, जबकि लंबी अवधि में रिटर्न की संभावना काफी बेहतर दिखाई देती है।

2026 के अंत तक कितनी तेजी की उम्मीद?

रेनिशा चनानी का अनुमान है कि यदि वैश्विक महंगाई धीरे-धीरे नियंत्रित होती है और फेड की सख्त नीति में नरमी आती है, तो साल के अंत तक सोना मौजूदा स्तरों से 20-30% तक की तेजी दिखा सकता है। वहीं चांदी में 30-40% तक का उछाल देखने को मिल सकता है।

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उनका कहना है कि केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। चीन सहित कई देशों की खरीदारी अभी भी जारी है, जो लंबी अवधि में सोने की कीमतों को मजबूत समर्थन दे सकती है।

क्या Gold ETF से निकासी चिंता की बात है?

हाल के महीनों में Gold ETF से कुछ निवेशकों ने पैसा निकाला है। हालांकि एक्सपर्ट इसे किसी बड़े संकट का संकेत नहीं मानतीं। उनके मुताबिक, पिछले साल सोने में शानदार रिटर्न मिलने के बाद कई निवेशकों ने केवल प्रॉफिट बुकिंग की है।

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वह कहती हैं कि ETF में सालाना आधार पर अब भी कुल निवेश सकारात्मक बना हुआ है। इसलिए इसे गोल्ड से निवेशकों के भरोसे में कमी नहीं माना जाना चाहिए।

Gold से ज्यादा आकर्षक बना Silver?

रेनिशा चनानी का मानना है कि फिलहाल चांदी में अधिक रिटर्न की संभावना दिखाई दे रही है। चांदी एक हाई-बीटा कमोडिटी है, इसलिए इसमें गिरावट भी ज्यादा आती है और तेजी भी सोने के मुकाबले अधिक होती है।

उन्होंने कहा कि AI डेटा सेंटर, 5G, सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से चांदी की औद्योगिक मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। पिछले कई वर्षों से चांदी की सप्लाई में कमी भी बनी हुई है, जो भविष्य में कीमतों को सहारा दे सकती है।

निवेशकों के लिए क्या होनी चाहिए रणनीति?

एक्सपर्ट की सलाह है कि निवेशक जल्दबाजी में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करें। यदि निवेश के लिए राशि तैयार है तो उसका करीब 50% मौजूदा स्तरों पर निवेश किया जा सकता है, जबकि बाकी राशि को SIP या नियमित अंतराल पर निवेश करना बेहतर रहेगा।

वह निवेशकों को अपने कुल पोर्टफोलियो का 15-20% हिस्सा सोना और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों में रखने की सलाह देती हैं। उनका मानना है कि यदि निवेशकों का नजरिया छह महीने से लेकर तीन साल तक का है, तो मौजूदा गिरावट भविष्य में बेहतर रिटर्न देने का अवसर साबित हो सकती है।