Gold Rates In India Last 10 Years: हाल के दिनों में डॉलर में कमज़ोरी और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों के बीच घरेलू वायदा बाज़ार में सोने के भाव में जबरदस्त उछाल देखी गई है। इस उछाल के साथ सोना प्रति 10 ग्राम 1 लाख रुपये के ऊपर पहुंचते हुए अब अपने ऑलटाईम हाई पर पहुंच गया है।
लगातार सोने के भाव में बढ़ोतरी के बीच अब त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग की उम्मीदों के साथ इस साल के अंत तक सोने का भाव कहां तक जा सकता है, इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
सोने के भाव में लगातार तेजी के कई फैक्टर हैं और आने वाले हफ्तों व महीनों में कौनसे फैक्टर सोने के भाव में बढ़त को बरकरार रखते हैं, यह जानना बहुत मत्वपूर्ण है। इससे पहले आइए जानते हैं कि पिछले 10 साल में सोने का भाव कहां से कहां तक पहुंचा और इस दौरान कौन-कौनसे फैक्टर प्रभावी रहे..
देश में सोने का भाव (Gold Price In India)
भारत में सोने की कीमतों में पिछले 10 वर्षों में उतार-चढ़ाव के साथ उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। भारत में 24 कैरेट सोने (प्रति 10 ग्राम) की कीमत 2015 में लगभग 26,343 रुपये थी और 2024 तक बढ़कर लगभग 64,070 रुपये हो गई और अब 2025 में 1,00,000 रुपये को पार कर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
भारत में सोने की कीमतें बुधवार (10 सितंबर) को सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं, जहां 24 कैरेट सोने का भाव 11,051 प्रति ग्राम (1.10 लाख प्रति 10 ग्राम) पर पहुंच गया। यह उछाल त्योहारी और शादियों के मौसम में मांग में वृद्धि के साथ-साथ अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती और बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव की उम्मीदों से प्रेरित वैश्विक तेजी के कारण आया है।
पिछले 10 साल में घरेलू बाज़ार में सोने की कीमत में बदलाव
पिछले 10 साल में सोने के भाव (24 कैरेट, प्रति 10 ग्राम) में तेजी की बात करें तो एक दशक में यह करीब 4 गुना हो चुका है। 2015 में सोने का भाव 26,343 रुपये प्रति दस ग्राम था जो अगले एक साल में यानी 2016 में बढ़कर 28,623 रुपये हो गया। इसी तरह से 2017 में सोने का भाव बढ़कर 29,667 रुपये, 2018 में 31,438 रुपये, 2020 में 48,651 रुपये, 2021 में 48,720 रुपये, 2022 में 52,670 रुपये, 2023 में 65,330 रुपये, 2024 में 64,070 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। वहीं, 2025 में सोने के भाव ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिया और 10 सितंबर तक 1.10 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ऑलटाईम हाई पर सोना
2025 की शुरुआत में अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की बढ़ती मांग के बीच सोना 3200 डॉलर प्रति औंस को पार कर गया। वहीं, अप्रैल 2025 तक फेडरल रिजर्व पर राजनीतिक दबाव और व्यापक बाजार अस्थिरता के कारण निवेशकों की प्रतिक्रिया के कारण, कीमतें और बढ़कर 3,500 डॉलर प्रति औंस हो गईं।
वहीं, अब लगातार अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। सोने की कीमत 10 सितंबर को रातोंरात रिकॉर्ड 3,674 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो इसके पिछले उच्चतम स्तर 3,636 अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा है। यह लगभग 5,560 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के बराबर है।
पिछले 10 साल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सोने के भाव में बदलाव
पिछले दस साल में सोने के भाव में बढ़ोतरी के कारण
पिछले एक दशक में सोने की कीमतें आमतौर पर अस्थिरता के साथ बढ़ी हैं। इसके प्रमुख कारणों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं विशेष रूप से हाल के वर्षों में घटित घटमाक्रम शामिल रहे हैं। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति की चिंताएं, कमजोर अमेरिकी डॉलर और केंद्रीय बैंक की खरीदारी ने कीमतों में लगातार वृद्धि को बढ़ावा दिया है।
सोने के भाव में और कितनी तेजी आएगी? (Gold Price Prediction)
ऑस्ट्रेलियाई बैंक एएनजेड ग्रुप ने बुधवार को वर्ष के अंत में सोने की कीमत का अपना पूर्वानुमान बढ़ाकर 3,800 डॉलर प्रति औंस कर दिया और उम्मीद जताई कि सर्राफा की मजबूत मांग के चलते अगले जून तक कीमतें 4,000 डॉलर के करीब पहुंच जाएंगी।
एएनजेड के विश्लेषकों ने एक नोट में कहा, "निरंतर उदार मौद्रिक नीति की संभावनाएं, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, मौजूदा व्यापक आर्थिक चुनौतियां और फेड की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं सोने में निवेश को मज़बूत करेंगी।"
बैंक ने कहा कि 2025 में केंद्रीय बैंक द्वारा सोने की खरीद 900 मीट्रिक टन से 950 मीट्रिक टन के बीच रहने का अनुमान है, जिसका अर्थ है कि वर्ष की दूसरी छमाही में 485 टन से 500 टन तक की खरीद की उम्मीद है। चीन के केंद्रीय बैंक ने अगस्त में अपने भंडार में सोना जोड़ा, जिससे सर्राफा की खरीदारी लगातार दसवें महीने जारी रही।
एएनजेड ने कहा, "श्रम बाजार के लिए बढ़ते जोखिम अमेरिकी फेड को मार्च 2026 तक अपने उदार रुख को बनाए रखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इससे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पर दबाव बढ़ेगा, जो आमतौर पर सोने की अपील को बढ़ाता है।" वहीं, गोल्डमैन सैक्स ने तो यहां तक चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को कमज़ोर किया गया तो सोने की कीमतें 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
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