Gold Price:अप्रैल 2026 की शुरुआत के साथ सोने में निवेश करने वालों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है, जिसका सीधा असर आम निवेशकों की जेब पर पड़ सकता है। सरकार ने Sovereign Gold Bond (SGB) से जुड़े नियमों में अहम बदलाव करते हुए सेकेंडरी मार्केट में मिलने वाले टैक्स बेनिफिट को खत्म कर दिया है।

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अब तक यदि कोई निवेशक मैच्योरिटी के बाद सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदता या बेचता था, तो उसे कैपिटल गेन टेक्स (Capital Gain Tax) नहीं देना पड़ता था। लेकिन अब नए नियमों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से यह छूट खत्म कर दी गई है। यानी अब अगर कोई निवेशक सेकेंडरी मार्केट में मैच्योरिटी के बाद SGB की खरीद-फरोख्त करता है, तो उसे टैक्स देना होगा।

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RBI से SGB लेने पर 2.5% ब्याज-
सीधे RBI (Reserve Bank of India) से SGB खरीदने वालों को पहले की तरह 2.5% सालाना ब्याज और मैच्योरिटी पर टैक्स-फ्री कैपिटल गेन का फायदा मिलता रहेगा। लेकिन सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड पर अब यह छूट लागू नहीं होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उन निवेशकों को झटका लग सकता है। जो कम कीमत पर SGB खरीदकर टैक्स-फ्री रिटर्न की रणनीति अपनाते थे।

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नए नियम से निवेशकों पर असर-
इस बदलाव का असर निवेश के गणित पर भी पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ने ₹7000 में SGB खरीदा और मैच्योरिटी पर इसकी कीमत ₹11,000 हो गई, तो ₹4000 का मुनाफा अब टैक्स के दायरे में आएगा। इससे निवेश की कुल कमाई पर असर पड़ेगा। बता दें कि सरकार ने साल 2015 में SGB योजना शुरू की थी ताकि लोग फिजिकल गोल्ड की बजाय डिजिटल गोल्ड में निवेश करें।

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सोने में उछाल से सरकार पर बोझ बढ़ा-
SGB योजना तेजी से लोकप्रिय भी हुई, लेकिन सोने की कीमतों में भारी उछाल के कारण सरकार पर इसका वित्तीय बोझ बढ़ने लगा। पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है। जहां 2025 में सोना करीब ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास था, वहीं अब यह ₹1.5 लाख के करीब पहुंच चुका है। एक समय तो कीमत ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के पार भी चली गई थी।

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ETF के नियमों में भी बदलाव-
दरअसल SEBI ने भी गोल्ड और सिल्वर ETF के नियमों में बदलाव किया है। पहले ETF की कीमत तय करने के लिए LBMA (London Bullion Market Association) के रेट का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब 1 अप्रैल 2026 से कीमतें भारतीय स्टॉक एक्सचेंज के आधार पर तय होंगी। सेबी का मानना है कि इस बदलाव से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय व घरेलू कीमतों के बीच का अंतर कम होगा।

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[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]