Gold Price Forecast for July: पिछले महीने सोने की कीमतों में लगातर दबाव जारी रहा। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है, क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाओं से डॉलर मजबूत हो रहा है। जून महीने की गिरावट ने साल 2008 में सोने की कीमतों में आई गिरावट को पार कर दिया। अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर 4,081.20 डॉलर पर आ गया। US-ईरान के बीच तनाव से तेल की कीमतें बढ़ीं, जबकि US फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों का सोने की कीमत पर और दबाव पड़ा।
सोने की कीमतों में क्यों आई गिरावट?
रविवार की सुबह ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। इससे कुछ समय पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान युद्ध खत्म करने के समझौते पर कायम नहीं रहा, तो वे ईरानी नेतृत्व को खत्म कर देंगे। जनवरी के आखिर में सोने की कीमत 5,600 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुँचकर एक नया रिकॉर्ड बना गई, और तिमाही के दौरान इसकी औसत कीमत 4,873 डॉलर प्रति औंस रही। हालांकि, मुख्य रूप से निवेश के लिए सोना जमा करने की वजह से कीमतें बढ़ने से गहनों की मांग पर असर पड़ा। युद्ध की वजह से गहनों के बाजार में भी रुकावट आई, क्योंकि मध्य पूर्व शिपिंग का एक अहम केंद्र है।
हालांकि, रविवार को 'एक्सियोस' (Axios) की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान और वाशिंगटन खाड़ी क्षेत्र में हालिया तनाव को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अपने विवाद पर बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमत हो गए हैं। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों तक चले जवाबी हमलों के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। इन हमलों ने उनके अंतरिम शांति समझौते की कमजोरी को उजागर किया और होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा की शिपिंग को फिर से धीमा कर दिया।
सोने की कीमतों में आगे क्या होगा?
ईरान युद्ध की वजह से एनर्जी की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, जिससे महंगाई का डर और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें पैदा हुईं। इस कारण सोने की कीमतों में 2024 के बाद पहली बार और जून 2013 की तिमाही के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट देखने को मिली। मारेक्स के एनालिस्ट एडवर्ड मीर ने कहा, "महंगाई ज्यादा है, ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें हैं और डॉलर मजबूत है। ये सभी बातें सोने की तेजी से जुड़ी आम सकारात्मक वजहों पर भारी पड़ रही हैं।"
आम तौर पर सोने को महंगाई से बचाव का जरिया माना जाता है, लेकिन ज़्यादा ब्याज दरों वाले माहौल में इसकी अहमियत कम हो जाती है। CME फेडवॉच टूल के मुताबिक, ट्रेडर्स को इस साल फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में तीन बार बढ़ोतरी की उम्मीद है और अभी सितंबर में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 64% मानी जा रही है।
इन्वेस्टर अब जून के ADP रोजगार और नॉन-फार्म पेरोल डेटा का इंतज़ार कर रहे हैं, जो इसी हफ्ते आने वाले हैं। इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर फेड के रुख का और अंदाजा लग सकेगा। डॉलर मजबूत हुआ और लगातार दूसरे महीने बढ़त की ओर बढ़ रहा है, जिससे दूसरी करेंसी रखने वालों के लिए डॉलर में कीमत तय होने वाला सोना महंगा हो गया है।
तेल की कीमतें 2020 के बाद अपनी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट की ओर बढ़ रही हैं। इन्वेस्टर इस हफ्ते दोहा में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के नतीजों पर नजर रखे हुए हैं, हालांकि ईरान ने कहा है कि कोई बैठक तय नहीं हुई है।
OCBC के कीमती धातुओं के रणनीतिकार क्रिस्टोफर वोंग ने एक नोट में कहा, "सोने की कीमतों में तेजी के लिए तीन में से कम से कम एक चीज में सुधार की जरूरत है- कम रियल यील्ड, कमज़ोर डॉलर या फेड की सख्त नीतियों की उम्मीदों में कमी। इसके बिना, तेजी ज्यादा देर नहीं टिकेगी और सोना पिछले उच्चतम स्तर से नीचे ही बना रह सकता है।"
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