Global Markets में लगातार बढ़ रही Uncertainity, अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर Confusion, डॉलर इंडेक्स की चाल और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बार फिर सोना निवेशकों के लिए चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। ऐसे समय में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने में आई गिरावट खरीदारी का मौका है या अभी और इंतजार करना चाहिए?

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इसी मुद्दे पर GoodReturns से खास बातचीत में Quantum AMC के फंड मैनेजर Chirag Mehta ने सोने के आउटलुक, फेड की नीति, चीन की खरीदारी और निवेश रणनीति पर विस्तार से अपनी राय रखी।

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30% करेक्शन के बाद क्या फिर आएगी तेजी?

चिराग मेहता के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपनी ऊंचाई से करीब 30% तक करेक्शन देख चुका है। फिलहाल कीमतें मजबूत सपोर्ट जोन के आसपास कारोबार कर रही हैं। उनका मानना है कि सोने में डाउनसाइड रिस्क अब पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है और अगले 3 से 6 महीनों में कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है।

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US Fed की ब्याज दरें तय करेंगी आगे की दिशा

एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति सोने की चाल तय करेगी। यदि ब्याज दरों में अपेक्षा से कम बढ़ोतरी होती है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है, तो रियल इंटरेस्ट रेट में नरमी आ सकती है। ऐसे हालात में डॉलर कमजोर होगा और सोने को मजबूती मिल सकती है।

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क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

चिराग मेहता का मानना है कि अगले एक-दो महीने तक सोने में कंसोलिडेशन रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर आकर्षक दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि यदि किसी निवेशक के पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी कम है, तो यह धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने का अच्छा समय हो सकता है।

Gold के लिए सबसे बड़ा जोखिम क्या?

हालांकि एक्सपर्ट ने यह भी माना कि सोने के सामने कुछ जोखिम मौजूद हैं। यदि मिडिल ईस्ट का तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है, तो महंगाई बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रख सकते हैं, जिससे सोने पर दबाव आ सकता है। हालांकि उनका मानना है कि फिलहाल बाजार इन जोखिमों को सीमित मानकर चल रहा है।

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सेंट्रल बैंक और चीन की खरीदारी दे रही सपोर्ट

चिराग मेहता के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई देशों ने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई है। चीन भी लगातार सोना खरीद रहा है और भविष्य में उसकी खरीदारी जारी रहने की संभावना है। यही वजह है कि वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है।

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क्या De-Dollarization से होगा फायदा?

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश धीरे-धीरे डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका का बढ़ता कर्ज, राजकोषीय घाटा और बदलती वैश्विक रणनीति कई देशों को अपने रिजर्व में सोने का हिस्सा बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही है। यदि यह ट्रेंड जारी रहता है तो लंबी अवधि में सोने को इसका फायदा मिल सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

चिराग मेहता के मुताबिक, हर निवेशक को अपने पोर्टफोलियो का लगभग 15% हिस्सा सोने में रखना चाहिए। उनके अनुसार Gold ETF और Gold Mutual Fund, फिजिकल गोल्ड की तुलना में अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और लागत के लिहाज से बेहतर विकल्प हैं।

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, फेड की आगामी नीति, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और चीन की मजबूत मांग को देखते हुए एक्सपर्ट फिलहाल सोने को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं। अल्पावधि में उतार-चढ़ाव जरूर रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर अवसर के रूप में देखे जा सकते हैं। हालांकि किसी भी निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।