नई दिल्ली, जुलाई 28। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) ने गुरुवार को कहा कि 2022 की पहली छमाही में भारत में सोने की मांग पिछले साल की तुलना में 42 प्रतिशत बढ़ गई है। काउंसिल ने कहा कि महंगाई बढ़ने के कारण दूसरी छमाही में खपत पिछले साल की तुलना में कम हो सकती है क्योंकि महंगाई के कारण सोने की बिक्री कम रहेगी। रुपये की वैल्यू में भी लागातार गिरावट हो रही है। रुपये की गिरती वैल्यू से भी सोने की मांग और किमते प्रभावित होंगी।
सोने के खरीद में भारत दुनिया का दूसरे नंबर का देश है। काउंसिल ने कहा कि दूसरे सबसे बड़े सोने के उपभोक्ता द्वारा कम खरीद करने से कीमते प्रभावित हो सकती है। पिछले एक साल से सोने की कीमत स्थिर बनी हुई है।
महंगाइ के कारण सोने की मांग बाजार में कम रहेगी। कम डिमांड के कारण सोने के आयात में गिरावट रहेगी। जिसका फायदा भारत को होगा। रुपये की गिरावट के बीच सोने का कम आयात होना भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। कम आयात से रुपया को मजबूती मिलेगी।
डब्ल्यूजीसी के क्षेत्रीय कार्यकारी प्रमुख सोमसुंदरम पीआर ने बताया कि मुद्रास्फीति के समय विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों में ही सोने की बीक्री प्रभावित होती है। बड़े शहरो में महंगाई का बिक्री पर कोई खास असर नहीं पड़ता है।
जून तिमाही में बढ़ी है मांग
डब्ल्यूजीसी ने कहा कि भारत में सोने की मांग एक साल पहले की तुलना में जून तिमाही में 43% बढ़कर 170.7 टन हो गई, क्योंकि शादी और वार्षिक पवित्र महोत्सव अक्षय त्रितिया के कारण गहने की बिक्री बढ़ गई। 2022 की पहली छमाही में, सोने की खपत 43 प्रतिशत बढ़कर 306.2 टन हो गई है। जून तिमाही भारतीय मार्केट के हर सेगमेंट के लिए बेहतर साबीत हुआ है।
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