इस वीकेंड भारतीय घरों में सोने की खूब चर्चा हो रही है और इसकी वजह भी वाजिब है। 10 मई 2026 को भारत में सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, जो वैश्विक अनिश्चितता, महंगाई की चिंता और सुरक्षित निवेश (Safe-haven) की मजबूत मांग को दर्शाती हैं। आज 24 कैरेट सोने का भाव 1,52,589 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंचती कीमतों के बीच, भारतीय बचतकर्ता अब सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के आकर्षण और PPF, SCSS व MIS जैसी सरकारी बचत योजनाओं के भरोसे के बीच उलझे हुए हैं कि पैसा कहां लगाना सही रहेगा।

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मई 2026 में सोने की चमक और SGB का क्रेज

भारत में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन हालिया रिकवरी ने इसे काफी मजबूती दी है। 5 मई को 14,918 रुपये तक फिसलने के बाद, 24 कैरेट सोना 6 मई को 15,131 रुपये और फिर 8 मई को 15,268 रुपये पर पहुंच गया। जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने में लंबी अवधि की तेजी को बरकरार रखेगी। यही वजह है कि फिजिकल गोल्ड को संभालने के झंझट से बचने के लिए निवेशक एक बार फिर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

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2026 में कैसा रहा SGB का रिटर्न?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2018-19 सीरीज I की अवधि 4 मई 2026 को पूरी हो गई। निवेशकों को इसमें करीब 386 फीसदी का जबरदस्त मुनाफा मिला, साथ ही पूरी अवधि के दौरान कुल 20 फीसदी का टैक्स-फ्री ब्याज भी मिला। वहीं, 20 अप्रैल 2026 को प्री-मैच्योर रिडेम्पशन के लिए कीमत 15,254 रुपये प्रति यूनिट तय की गई थी, जिससे 2020 सीरीज के निवेशकों को 202 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न मिला। ये आंकड़े इस स्कीम की ओर निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब फिलहाल SGB की कोई नई किस्त (Tranche) घोषित नहीं की गई है।

बजट 2026: SGB के टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव

केंद्रीय बजट 2026 ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को लेकर निवेशकों का नजरिया पूरी तरह बदल दिया है। कभी टैक्स के लिहाज से सबसे बेहतरीन निवेश माना जाने वाला SGB अब अपना एक बड़ा फायदा खो चुका है। बजट 2026 में कुछ शर्तों के साथ मैच्योरिटी पर मिलने वाली टैक्स छूट को खत्म कर दिया गया है, जिससे निवेशक अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या इसमें पैसा लगाना अब भी समझदारी है। अब कैपिटल गेन्स टैक्स की छूट सिर्फ उन्हीं ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स को मिलेगी जो मैच्योरिटी तक बॉन्ड को अपने पास रखेंगे। अगर आप सेकेंडरी मार्केट (शेयर बाजार) से SGB खरीदते हैं, तो आपको मैच्योरिटी पर मुनाफे पर टैक्स देना होगा।

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SGB vs PPF vs SCSS vs MIS: कहां है ज्यादा फायदा?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर सालाना 2.5 फीसदी का फिक्स्ड ब्याज मिलता है, जिसका भुगतान हर छह महीने में किया जाता है। यह ब्याज बॉन्ड खरीदते समय की कीमत पर मिलता है और पूरी अवधि के दौरान स्थिर रहता है। हालांकि, यह ब्याज टैक्स के दायरे में आता है। दूसरी ओर, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए PPF की ब्याज दर 7.1 फीसदी पर बरकरार है। सरकारी सुरक्षा, कंपाउंडिंग और EEE (टैक्स फ्री निवेश, ब्याज और रिटर्न) के फायदे के कारण PPF आज भी रिटायरमेंट और टैक्स प्लानिंग के लिए सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक है।

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स्कीमब्याज दरअवधिब्याज पर टैक्सकैपिटल गेन्स टैक्स
SGB (ओरिजिनल सब्सक्राइबर)2.5% + सोने की कीमत में बढ़त8 सालटैक्स योग्य (स्लैब के अनुसार)मैच्योरिटी पर शून्य
SGB (सेकेंडरी मार्केट)2.5% + सोने की कीमत में बढ़त8 सालटैक्स योग्य (स्लैब के अनुसार)12.5% LTCG
PPF7.1% सालाना15 सालटैक्स फ्री (EEE)लागू नहीं
SCSS8.2% सालाना5 सालटैक्स योग्य (स्लैब के अनुसार)लागू नहीं
पोस्ट ऑफिस MIS7.4% सालाना5 सालटैक्स योग्य (स्लैब के अनुसार)लागू नहीं

PPF और SCSS: सुरक्षित निवेश चाहने वालों का भरोसा

वित्त मंत्रालय ने अप्रैल-जून 2026 की तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। PPF, SCSS और NSC की दरें लगातार आठवीं तिमाही से स्थिर बनी हुई हैं। सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) 8.2 फीसदी ब्याज के साथ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली सरकारी योजनाओं में से एक है। रिटायर हो चुके लोगों के लिए हर तिमाही मिलने वाला यह निश्चित ब्याज काफी अहम है, खासकर तब जब सोने की कीमतों में कभी भी बड़ी गिरावट या उछाल का जोखिम रहता है।

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इस 'गोल्ड रश' में किसे क्या चुनना चाहिए?

निवेशकों को लिक्विडिटी, रिटर्न और टैक्स के बीच सही तालमेल बिठाना होगा। SCSS और SSY जैसी स्कीमें ज्यादा ब्याज देती हैं लेकिन इनमें पैसा निकालने की शर्तें कड़ी हैं। PPF में टैक्स की सबसे ज्यादा बचत होती है लेकिन इसमें पैसा लंबे समय के लिए लॉक हो जाता है। ध्यान रहे कि SGB निवेश पर धारा 80C के तहत छूट नहीं मिलती। अगर टैक्स बचाना आपकी प्राथमिकता है, तो पहले PPF में 1.5 लाख रुपये तक की सीमा पूरी करें, फिर अतिरिक्त निवेश के लिए SGB पर विचार करें। यह रणनीति उन लोगों के लिए बेस्ट है जो गारंटीड रिटर्न के साथ सोने की तेजी का फायदा भी उठाना चाहते हैं।

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लिक्विडिटी का सवाल: निवेश से पहले जरूर सोचें

SGB की मैच्योरिटी 8 साल की होती है, हालांकि 5 साल बाद RBI के बायबैक विंडो के जरिए बाहर निकलने का विकल्प मिलता है। निवेशकों को मिलने वाला 2.5 फीसदी सालाना ब्याज 'अन्य स्रोतों से आय' के रूप में टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है। 2026 में SGB की नई किस्तें न आने की वजह से निवेशकों को सेकेंडरी मार्केट पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जहां कीमतें घटती-बढ़ती रहती हैं और सबसे बड़ी बात यह कि वहां मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन्स टैक्स की छूट भी नहीं मिलती।

आज के समय में सही फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि आपका लक्ष्य क्या है और आप किस टैक्स स्लैब में आते हैं। अगर आप लंबी अवधि के लिए फंड बनाना चाहते हैं, तो PPF का टैक्स फ्री स्ट्रक्चर और कंपाउंडिंग का फायदा बेजोड़ है। वहीं, अगर आपको सोने की कीमतों में लंबी अवधि की तेजी पर भरोसा है और आप 8 साल तक निवेश बनाए रख सकते हैं, तो सीधे इश्यू के जरिए SGB खरीदना अब भी फायदेमंद हो सकता है। फिलहाल सबसे खराब रणनीति सिर्फ सोने की हेडलाइंस देखकर बिना सोचे-समझे निवेश करना होगी।