Gold Jewellery Buying Tips: शादी का सीजन फिर से शुरू हो गया है। देशभर में लोग शादियों की वजह से सोने-चांदी की जमकर खरीदारी करते हैं। सोने के जेवर खरीदते समय आपको कुछ चीजों के बारे में जानना जरूरी होता है क्योंकि कई चीजों की वजह से सोने की कीमत पर असर पड़ता है। मेकिंग चार्ज के अलावा डिजाइन, क्राफ्ट्समैनशिप और रिटेलर पॉलिसीज जैसे फैक्टर्स के आधार पर अलग-अलग प्राइस भी तय हो सकता है। आइए इसके बारे में आपको बताते हैं।

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सोने की शुद्धता जानना है जरूरी

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सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सोने की शुद्धता को कैरेट में बताया जाता है। 24K (99.9% शुद्ध) का इस्तेमाल आभूषणों के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ निवेश के लिए किया जाता है और 22K जोकि 91.6% शुद्ध सोने यह ज्यादातर ज्वैलरी के लिए स्टैंडर्ड है। इसके अलावा 3. 18K (75% शुद्ध) सोने का इस्तेमाल डिजाइनों और रत्न-जड़ित ज्वैलरी में किया जाता है।

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मेकिंग चार्जेज का रखें ध्यान

जब भी कोई ज्वैलरी खरीदता है तो उसकी खरीदी पर मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। उस ज्वैलरी की डिजाइन पर मेकिंग चार्ज तय होता है। अगर किसी सोने की ज्वैलरी में ज्यादा बारीकी से काम किया गया होगा तो उसका मेकिंग चार्ज ज्यादा देना होता है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी ज्वैलरी का मेकिंग चार्ज उसकी कीमत का 10 से 25 फीसदी तक होता है। अगर 1 लाख रुपये की कोई गोल्ड ज्वैलरी ली है तो इसपर 10 फीसदी मेकिंग चार्ज लगता है तो फिर आपको 1 लाख की बजाए 1 लाख 10 हजार देने पड़ेंगे। लेकिन, अगर आप दोबारा इस ज्वैलरी को बेचने जाएंगे तो फिर आपके मेकिंग चार्ज के रुपये काट लिए जाएंगे।

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मेकिंग चार्जेज के प्रकार की बात करें तो ये परसेंटेज बेस्ड और प्रति ग्राम चार्जेज पर तय होते हैं। मेकिंग चार्जेस को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स में डिजाइन, ज्वैलरी के प्रकार, हैंडक्राफ्टेड वर्सेज मशीन-मेड, ब्रांड्स और स्टोर, शामिल होते हैं। मेकिंग चार्ज की तुलना करने के लिए आप अलग-अलग ज्वैलर्स के पास जा सकते हैं।

ऑफर्स और डिस्काउंट का उठाएं फायदा

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कुछ ज्वैलरी ब्रांड्स लॉयल्टी प्रोग्राम या एडवांस खरीद ऑफर देते हैं, जो मेंबर्स के लिए मेकिंग चार्ज को कम या खत्म कर देते हैं। इसके अलावा आप अलग-अलग ब्रांड्स में चेक कर सकते हैं किसी से आपको अधिक डिस्काउंट ऑफर हो रहा है या नहीं।