नयी दिल्ली। क्या आपने कभी ऐसी नदी के बारे में सुना है, जिससे सोना निकलता हो? अगर नहीं तो आज हम आपको एक ऐसी ही नदी के बारे में बताएंगे, जिससे सच में सोना निकलता है। इस तरह की चीजें फिल्मों में दिखाई जाती हैं। मगर हम जिस नदी के बारे में बताने जा रहे हैं वो कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। जरूरी बात है कि ये नदी किसी और देश में नहीं बल्कि अपने भारत में बहती है। लोग इस नदी से सोने के टुकड़े जमा करते हैं और उन्हें बेच कर पैसा कमाते हैं। बताया जाता है इस नदी से सैकड़ों सालों से सोने के टुकड़े निकल रहे हैं। आइए जानते हैं इस नदी के बारे में विस्तार से।
एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार स्वर्णरेखा नदी झारखंड में बहती है। इस नदी में सोने के टुकड़े मिलते हैं इसीलिए इसका नाम स्वर्णरेखा रखा गया है। ये नदी झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी बहती है। इससे निकलने वाले सोने के टुकड़ों से कई परिवार कमाई करते हैं। नदी में सोने के छोटे कण मिलते हैं, जिन्हें ये परिवार बीनते हैं। ये लोग सोने के कण बीनने का काम कई पीढियों से कर रहे हैं।
झारखंड की राजधानी रांची से करीब 16 किलोमीटर दूर एक गांव है, जिसका नाम है नगड़ी। वहां छोटे से खेत में कई गड्ढे हैं, जहां से लगातार पानी निकल रहा है। यही धाराएं आगे चल कर स्वर्णरेखा नदी बन जाती हैं। झारखंड की यह नदी किसी दूसरी नदि में जाकर खत्म नहीं होता, बल्कि अंत में बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। नदी के किनारों पर रुके हुए पानी को देखने से ही पता चल जाता है कि जमीन के नीचे से जो पानी आ रहा है उसके साथ मिनरल भी बाहर आ रहे हैं। यानी पानी जमीन के नीचे से ही मिनरल लेकर आता है।
नदी में मिलने वाले इन टुकड़ों से बहुत सारे परिवार पैसा कमा कर जिंदगी गुजार रहे हैं। जो लोग सोने के कण बीनते हैं उनके अनुसार सोने के कण गेहूं के दाने के साइज के होते हैं। आइए जानते हैं कि रोजाना कितना सोना इस नदी से मिलता है और लोग कितना पैसा कमाते हैं।
नदी से सोना तो मिलता है, मगर ये बहुत ज्यादा नहीं होता। ग्रामीणों बताते हैं कि किसी व्यक्ति को रोज 1-2 सोने के टुकड़े ही मिलते हैं। इनकी कीमत 200-400 रु होती है। इस हिसाब स एक व्यक्ति महीने में 5-7 हजार रु कमा लेता है। नदी के रेत में सोने के कण कैसे मिलते हैं यह एक तरह का रहस्य है। कई बार सरकार ने सोने के कण निकलने के असल कारण का पता लगाने की कोशिश की। मगर कोई सटीक जानकारी हासिल नहीं हो सकी।
ये नदी बंगाल की खाड़ी में मिलने से पहले 474 किमी का सफर तय करती है। इस सफर में कई छोटी-बड़ी नदियां स्वर्णरेखा में आकर मिलती हैं। जो नदियां स्वर्णरेखा में आकर मिलती हैं उनमें से एक है करकरी। कुछ लोग कहते हैं कि करकरी नदी से सोने के कण स्वर्णरेखा में मिल जाते हैं।
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