Gold ETF : एक समय था जब दुनिया में लोग करेंसी के रूप में सोने का इस्तेमाल करते थे। हालाँकि धीरे-धीरे करेंसियों को सोने से अलग कर दिया गया। फिर सोना बना सबसे अच्छे निवेश ऑप्शनों में से एक। आज के समय में सोने में निवेश के लिए ढेर सारी योजनाएं मौजूद हैं। ऐसे में किसी निवेशक को फिजिकल सोने में निवेश करने की आवश्यकता नहीं रह गयी है। गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ), गोल्ड फ्यूचर्स, गोल्ड सेविंग्स फंड्स, गोल्ड बॉन्ड आदि कुछ लोकप्रिय पेपर गोल्ड निवेश विकल्प हैं जो निवेशकों को काफी आकर्षित कर रहे हैं। हालांकि, जब सोने को प्रोफिट के लिए बेचने की बात आती है, तो इस पर होने वाले लाभ पर टैटैक्स जनरल कंजम्पशन टैक्स और आयकर के तहत लगता है। यहां हम आपको बताएंगे कि विभिन्न तरीकों में सोने के निवेश पर कैसे टैक्स लगाया जाता है। साथ ही जानेंगे कि गोल्ड ईटीएफ की होल्डिंग 3 साल रख कर आप कैसे इंडेक्सेशन का बेनेफिट ले सकते हैं।
गोल्ड ईटीएफ का ट्रेड स्टॉक एक्सचेंज पर होता है। एक गोल्ड ईटीएफ यूनिट 1 ग्राम फिजिकल गोल्ड के बराबर होती है। गोल्ड ईटीएफ की बिक्री पर प्राप्त लाभ पर टैक्स फिजिकल सोने की बिक्री के बराबर ही लगता है। मगर तीन साल की होल्डिंग अवधि से पहले शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन आपकी आय में जोड़ा जाता है और मौजूदा स्लैब रेट के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। वहीं तीन साल की होल्डिंग के बाद लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन इंडेक्सेशन बेनिफिट्स के साथ 20 फीसदी टैक्स रेट के अधीन होता है। इसलिए, यदि आपके सोने का मूल्य प्रत्येक वर्ष 12% बढ़ता है और उसी अवधि में मुद्रास्फीति 8% तक बढ़ जाती है, तो टैक्स केवल 4% पर लागू होगा। ये एक बड़ा फायदा है।
गोल्ड सेविंग फंड्स जिन्हें फंड ऑफ फंड्स भी कहा जाता है, डायरेक्टली या इनडायरेक्टली रूप से गोल्ड रिलजर्व में निवेश करते हैं। गोल्ड फंड में निवेश करने के लिए निवेशक को डीमैट खाता खोलने की आवश्यकता नहीं है। भारत में, गोल्ड फंड्स पर टैक्सेशन काफी हद तक सोने के आभूषणों पर लगाए जाने वाले टैक्सेज के समान है।
एसजीबी पर मिलने वाला ब्याज आईटी अधिनियम, 1961 के अनुसार टैक्सेबल है। मैच्योरिटी राशि पर कैपिटल गेन पूरी तरह से टैक्स फ्री है। हालांकि, यदि मैच्योरिटी से पहले इसे रिडीम किया जाता है, तो कैपिटल गेन टैक्स देय होता है।
सरकार बेकार पड़े सोने को जीएमएस में जमा करने को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स बेनेफिट की पेशकश करती है। इस योजना पर टैक्स लागू नहीं है क्योंकि डिपॉजिट सर्टिफिकेस को कैपिटल एसेट्स नहीं माना जाता है क्योंकि इसमें सोने का ट्रांसफर शामिल नहीं है। इसके अलावा, कैपिटल गेन को आयकर अधिनियम की धारा 10(15) के तहत वेल्थ टैक्स और आयकर से भी छूट प्राप्त है।
जब आप फिजिकल सोना बेचते हैं तो 20 फीसदी टैक्स रेट लगता है। साथ ही लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 4 फीसदी सेस भी लगता है। इसके अलावा, आभूषण खरीदने पर, यदि कोई 2 लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषणों के लिए नकद भुगतान करता है, तो 1 फीसदी टीडीएस और 3 फीसदी जीएसटी सोने की वैल्यू पर लगाया जाता है।
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