नई दिल्ली, अगस्त 02। देश में वन गोल्ड वन रेट स्कीम को लागू करने की मांग बहुत पुरानी है। सोने के दाम को लेकर मांग इसलिए उठती है क्योंकि सोना तो एक ही होता है लेकिन उसका दाम देश के अलग-अलग शहरो में अलग-अलग होता है। सोने की शुद्धता का पैमाना एक है लेकिन दाम में अंतर होता है। देश के तटीय प्रदेशो से पहाड़ी प्रदेशो तक आपको सोने की खरीद रेट में अंतर मिल जाएगा।

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ट्रांसपोर्ट शुल्क है कारण

अलग-अलग शहरों में सोने के दाम में अंतर इसलिए होता है क्योंकि सोनी जिस बंदरगाह पर आयात होता है, वहा से अलग-अलग राज्यों में भेजे जाने का ट्रांसपोर्ट खर्च अलग-अलग होता है। आयात खर्च समान होने के बाद भी ट्रांसपोर्ट खर्च में असमानता होने के कारण अलग-अलग राज्यों में दाम भिन्न होता है। सरकार लंबे समय से वन गोल्ड वन प्राइस पर विचार कर रही थी लेकिन अब जाकर यह विचार सफल होता दिख रहा है।

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व्यापारी भी है खुश

भारत का अपना बुलियन एक्सचेंज खुलने से व्यापरी भी खुश है। ज्वेलर्स को अब अंतरराष्ट्रीय दाम पर सीधे सोना खरीदने की सुविधा मिलेगी। अब उन्हें ढुलाई के लिए कोई फीस नहीं देना पड़ेगा। ट्रांसपोर्टेशन चार्ज लगने से ही अलग-अलग राज्यों में सोने के भाव में अंतर होता है। बुलियन एक्सचेंज खुलने से वन नेशन वन गोल्ड रेट स्कीम शुरू करने में अब आसानी हो गई है। बुलियन एक्सचेंज खुलने के बाद ज्वेलर्स और बैंक अंतरराष्ट्रीय भाव पर ही सोने का आयात कर सकेंगे।

क्या होगा फायदा

सुचना के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय रेट पर सोना खरीदने की सुविधा अभी सभी व्यापारियों को नहीं दी जाएगी। सरकार के अनुसार बुलियन एक्सचेंज के दायरे में जो ज्वेलर्स आएंगे, केवल वही अंतरराष्ट्रीय किमतो पर सोने का आयात कर सकेंगे। बुलियन एक्सचेंज लागू होने से व्यापारियों का फ्रेट चार्ज यानी कि ढुलाई का खर्च बचेगा, जिसके कारण सोने का दाम कम होंगे।

वन गोल्ड वन नेशन हो सकेगा लागू

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गांधीनगर में भारत का बुलियन एक्सचेंज लांच किया। बुलियन एक्सचेंज खुलने के कई लाभ होंगे। सबसे पहली बात की इससे सोने के दाम तय करने में पारदर्शिता होगी। अब देश में सोना एक ही जगह से निकलेगा इसलिए दाम और शुद्धता का पैमाना सेट करने में आसानी होगी। ग्राहको को अब सोना खरीदने में भिन्नता का सामना करना होगा।