नयी दिल्ली। जल शक्ति मंत्रालय ने 'गोबरधन' योजना पर एक यूनिफाइड पोर्टल लॉन्च किया। इस पोर्ट्ल का उद्देश्य मवेशियों और बायोडिग्रेडेबल कचरे का निपटारा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना है। गोबरधन योजना को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज-2 के तहत जरूरी कार्यक्रम का हिस्सा माना जा रहा है। इस पोर्ट्ल से किसानों को बड़ा फायदा होगा। ये पोर्टल किसानों को इनकम बढ़ाने में मदद करेगा। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के अनसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक किसानों की इनकम डबल करने का टार्गेट रखा है। असल में नया पोर्टल इसी कड़ी का हिस्सा है।
केंद्र सरकार के नये गोबरधन पोर्टल पर इस योजना से जुड़ी हुई सारी जानकारी मिलेगी। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक ये अगले पांच साल में किसानों को 1 लाख करोड़ रु की इनकम हासिल करने में मदद करेगी। गोबरधन योजना का ऐलान 2018 के बजट में किया गया था। गोबरधन योजना का अहम मकसद गांवों को पशुओं के गोबर और खेतों में मिलने वाले ठोस अपशिष्ट पर्दाथों को कंपोस्ट और बायो-गैस में बदलना है। इससे कमाई के साथ-साथ ऊर्जा पैदा की जाती है।
जो किसान बायोगैस या इथेनॉल के उत्पादन से जुड़ी हुई कोई जानकारी लेना चाहे तो इस पोर्टल की मदद से इस तरह की सारी जानकारी हासिल कर सकता है। बायोगैस के प्लांट के मामले में लोन और आर्थिक सहायता की जानकारी भी इस पोर्टल से ली जा सकती है। इसी तरह राज्यो में कृषि संबंधित उत्पादों और मशीनरी से जुड़ी हुई जानकारी भी इस पोर्टल के जरिए किसानों को दी जाएगी।
कृषि मंत्री का दावा है कि गोबरधन योजना से ठोस अपशिष्ट के निपटारे में आसानी होगी। साथ ही ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा युवा कमाई भी कर सकेंगे। इसी तरह छत्तीसगढ़ सरकार ने भी एक ऐसी ही योजना शुरू की हुई है। इसमें किसानों से गोबर खरीदा जाता है। बदले में किसानों को पैसे दिए जाते हैं।
छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने पिछले साल जुलाई में गोधन न्याय योजना शुरू की थी। गोधन न्याय योजना के तहत सरकार पशुपालकों से गोबर खरीदती है। ये गोबर पशुपालकों से 2 रु प्रति किलो (टांसपोर्ट शुल्क सहित) के मूल्य पर खरीदा जाता है। सरकार इस योजना में गाय और भैंस वंशीय पशुओं का गोबर खरीदती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पशुपालकों से गोठान समितियों के जरिए गोबर खरीदा जाता है। इससे वर्मी कम्पोस्ट और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
गोधन न्याय का फायदा उठाते हुए कई पशुपालक कमाई कर रहे हैं। दूध बेचने के साथ-साथ सरकार को गोबर बेचने से उनकी इनकम में बढ़ोतरी हुई है। बता दें कि पंजाब और हरियाणा में भी छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना जैसी स्कीम शुरू करने की मांग उठी है।
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