World recession crisis: वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के पूरे आसार हैं। एक नए सर्वेक्षण में अर्थशास्त्रियों ने एक बार फिर विश्व के प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास पूर्वानुमानों में कटौती की है जबकि केंद्रीय बैंक लगातार उच्च मुद्रास्फीति को कम करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि कर रहे हैं। एक अच्छी बात यह है कि अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं जो पहले से ही मंदी में हैं या मंदी की ओर बढ़ रही हैं, उनमें मंदी का असर पिछले मंदी की तुलना में कमजोर हैं, लोग पिछले मंदी की तुलना में बेरोजगार कम हो रहे हैं। इस मंदी में विकास दर और बेरोजगारी के बीच सबसे छोटा अंतर होने की उम्मीद है।

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मंदी की तीव्रता रह सकती है कम

बेरोजगारी न बढ़ना मंदी की तीव्रता को कम कर सकता है। अधिकांश जानकारों का कहना है कि यह प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में इसका असर कम रहेगा। लेकिन मंदी के कारण मुद्रास्फीति अपेक्षा से अधिक समय तक बनी रह सकती है। विश्व के शीर्ष वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दर को बढ़ाया है, लेकिन मुद्रास्फीति अभी भी उनके तय लिमिट से बहुत अधिक है। इसके कम होने की भी उम्मीद बहुत कम है।

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मुद्रास्फिति है समस्या

मुद्रास्फीति की समस्या को दूर करने के लिए वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने इस वर्ष का अधिकांश समय दरों में वृद्धि को को मेंटेन करने में खर्च किया है। अधिकांश अर्थशास्त्रियों और केंद्रीय बैंकों का मानना ​​है कि अगले साल ब्याज दरों पर नियंत्रण करने के लिए बहुत कम काम होगा। राबोबैंक के अनुसार वैश्विक मंदी का जोखिम विश्व की सभी बड़ी अर्थव्यस्थाओं पर डगमगा रहा है।

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बेरोजगारी पर मंदी का असर कम

कम बेरोजगारी दर को देखते हुए केंद्रीय बैंक महसूस करेंगे कि वे मुद्रास्फिति से लड़ने के लिए दरों में वृद्धि जारी रख सकते हैं। इस बार 22 केंद्रीय बैंकों को ब्याज दर बढ़ाने का अनुमान था। ड्यूश बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि इतिहास कभी भी ठीक से नहीं दोहराता है, लेकिन चूंकि पिछले 18 महीनों में मुद्रास्फीति की भविष्यवाणी आम तौर पूरी तरह से सटीक रही है इसलिए यह देखने वाली बात होगी की आनेवाले समय में मुद्रास्फिति कितना परेशान करती है। फिलहाल तो यह कम होती नहीं दिख रही है। इस बीच वैश्विक इक्विटी और बॉन्ड बाजार स्थिर नहीं हैं, जबकि अमेरिकी डॉलर अमेरिकी दर की उम्मीदों के आधार पर विदेशी मुद्रा बाजारों में बहु-दशक के शिखर पर है। कोविड-19 के प्रभावों के बाद रुस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक मंदी के संकेत दिए हैं।

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