Cross-Border Digital Payment Platform Skydo: भारत में बीते एक दशक में डिजिटल पेमेंट की दिशा में बहुत बड़ी क्रांति देखने को मिली है। यही कारण है कि देश के कोने-कोने में चाहे ग्रामीण इलाका हो या शहरी, बहुत बड़े-बड़े बिजनेस टायकून से लेकर अब आम रेहडी-पटरी वालों तक यूपीआई के ज़रिए डिजिटल पेमेंट की सुविधा पहुंच चुकी है।

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हालांकि, ग्लोबल ट्रेड तेजी से बढ़ने के चलते सीमा पार यानी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट एक बड़ी समयस्या अभी भी बनी हुई है। इस समयस्या के निदान के लिए कई प्लैटफॉर्म अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे हैं, जिसमें से एक बेंगलुरु स्थित फिनटेक स्टार्टअप स्काईडो (Skydo) भी शामिल है। स्काईडू का लक्ष्य भारतीय व्यवसायों के लिए इंटरनैशनल पेमेंट को आसान बनाना है।

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अपने कंपनी के लक्ष्य और नज़रिया समेत तामम तरह के सवालों के संदर्भ में स्काईडो के संस्थापक श्रीवत्सन श्रीहर ने गुडरिटर्न्स के साथ बातचीत में जवाब साझा किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी उद्यमशीलता (एंटरप्रोन्योरशिप) की यात्रा, क्रॉस बॉर्डर पेमेंट सिसस्टम की चुनौतियों और कंपनी के लिए अपने दीर्घकालिक विजन के बारे में बात की।

सवाल : स्काईडो को शुरु करने के पीछे क्या प्रेरणा रही?

जवाब : स्काईडू के सीईओ श्रीवत्सन श्रीहर ने बताया कि एंंटरप्रोन्योर बनने की इच्छा ही उनकी मुख्य प्रेरणा थी। वह और उनके सह-संस्थापक फिनटेक की एक बड़ी समस्या का समाधान करना चाहते थे और सीमा पार भुगतान यानी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ। उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय वायर ट्रांसफर अभी भी जटिल हैं, साधारण स्थानीय भुगतानों के विपरीत है। हमारा विचार था, क्या हम वैश्विक भुगतानों को यूपीआई जितना आसान बना सकते हैं?"

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सवाल: स्काईडो ने क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को ही क्यों चुना?

जवाब : श्रीवत्सन श्रीहर ने यह बताते हुए कि क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को क्यों चुना, उन्होंने मौजूदा प्रणालियों की कमियों को उजार किया। उन्होंने कहा, "पारंपरिक प्लेटफ़ॉर्म क्रेडिट कार्ड रेल्स पर निर्भर करते हैं। इसके बजाय, हम दुनिया भर के साझेदार बैंकों के साथ इंट्रीग्रेट करते हुए, सीधे बैंक-से-बैंक ट्रांसफर पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इससे भुगतान तेज़, सरल और किफ़ायती हो जाता है, और रिसीवर को कोई प्रयास नहीं करना पड़ता।"

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सवाल : स्काईडो में जेनरेशन Z वर्कफोर्स के प्रबंधन की चुनौतियां और लाभ क्या हैं?

जवाब : एक बड़े पैमाने पर युवा वर्कफोर्स (Gen Z) के साथ काम करने के बारे में पूछे जाने पर श्रीहर ने स्वीकार किया कि स्काईडो के 100 कर्मचारियों में से अधिकांश नए स्नातक हैं। उन्होंने कहा कि इसके लाभ महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि जेनरेशन Z के कर्मचारी निडर होते हैं और उद्योग के पूर्वाग्रहों के बिना, मूल सिद्धांतों पर सोचते हैं। उन्होंने आगे कहा, "इससे हमें कुछ नया बनाने में मदद मिलती है।" हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि ग्राहकों और बैंकों के साथ अपने काम के घंटों का तालमेल बिठाना कभी-कभी एक चुनौती हो सकती है।

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सवाल: स्काईडो की हायरिंग फिलॉस्फी क्या है?

जवाब : स्काईडो के हायरिंग फिलॉस्फी पर चर्चा करते हुए श्रीहर ने प्रेरणा और पहल को पहचानने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "हम प्रेरणा के प्रमाण की तलाश करते हैं, चाहे वह शैक्षणिक उत्कृष्टता हो, शुरुआती इंटर्नशिप हो या पहल हो। हम योग्यता से ज़्यादा मूल सिद्धांतों वाली सोच और दृष्टिकोण को महत्व देते हैं।" उनके अनुसार, संस्थापकों को एक दृष्टिकोण निर्धारित करना चाहिए, बेहतरीन लोगों को नियुक्त करना चाहिए और ऐसी प्रणालियाँ बनानी चाहिएं जिनसे टीम परिणाम दे सके।

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सवाल: स्काईडू का फंड कहां से आता है?

जवाब : फंड जुटाने के सवाल को श्रीहर ने इसे चुनौतीपूर्ण और अतिरंजित बताया। उन्होंने कहा कि मीडिया अक्सर फंड जुटाने के बारे में एक विकृत धारणा बनाता है। उन्होंने कहा, "वास्तविकता यह है कि 99% स्टार्टअप एक दौर से आगे धन नहीं जुटा पाते हैं, और सफल स्टार्टअप को भी संघर्षों का सामना करना पड़ता है। संस्थापकों को यह समझने की ज़रूरत है कि निवेशक व्यापक स्तर पर सोचते हैं, जबकि हम परिचालन में गहराई से डूबे रहते हैं।"

सवाल: स्काईडू का लॉन्गटर्म विजन क्या है?

जवाब: कंपनी के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के बारे में श्रीहर ने कहा कि वह चाहते हैं कि स्काईडो वैश्विक B2B पेमेंट सेक्टर में अग्रणी बने। उन्होंने कहा, "अगले दशक में भुगतान बहुत अलग रूप लेगा - तत्काल भुगतान, क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन मुख्यधारा बन जाएंगे। हम उस भविष्य को आकार देने वाली कंपनियों में शामिल होना चाहते हैं।"

फ़िलहाल, हमारा ध्यान भारत में विस्तार, आयात और निर्यात दोनों के लिए ग्राहक अनुभव में सुधार और धीरे-धीरे वैश्विक बाज़ारों में विस्तार पर है। उन्होंने आगे कहा, "पेपैल या स्ट्राइप की तरह, हम भारत की एक ऐसी भुगतान कंपनी बनना चाहते हैं जो दुनिया भर में सेवा प्रदान करे।"

सवाल: पारिवारिक व्यवसाय ने श्रीवत्सन श्रीहर की उद्यमशीलता की भावना को कैसे आकार दिया?

जवाब : अपनी पृष्ठभूमि के बारे में बताते हुए श्रीहर ने कहा कि उनमें उद्यमशीलता की प्रेरणा चेन्नई में पले-बढ़े होने से आई है, जहां उनके पिता एक स्व-निर्मित व्यवसायी थे। उन्होंने देखा कि कैसे उद्यमिता एक पीढ़ी के भीतर एक परिवार की आर्थिक स्थिति को बदल सकती है। अपने पारिवारिक व्यवसाय में कई साल बिताने के बाद, उन्होंने अपना करियर फिर से शुरू करने, बेंगलुरु जाने और स्टार्टअप इकोसिस्टम में पूरी तरह से डूब जाने का फैसला किया। उन्होंने कहा, "मैं एक वैश्विक, तकनीक-संचालित कंपनी बनाना चाहता था।"

अपने व्यक्तिगत विकास पर विचार करते हुए श्रीहर ने कहा कि उद्यमिता ने उन्हें अधिक खुले विचारों वाला और प्रतिभा की कद्र करने वाला बनाया है। उन्होंने कहा, "उत्कृष्ट लोग बेहतरीन कार्य वातावरण बनाते हैं। इन वर्षों में, मैंने बेहतर योजना बनाना और अपनी कमज़ोरियों को प्रबंधित करना भी सीखा है।"