Impact of Iran-Israel War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजार की धड़कन तेज कर दी है। ईरान और इजरायल के बीच टकराव गहराने से एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) ढोने वाले जहाजों की मांग अचानक बढ़ गई है।
अटलांटिक बेसिन में टैंकरों का दैनिक किराया 2 लाख डॉलर के पार बताया जा रहा है, जो एक दिन पहले के स्तर से लगभग दोगुना है। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि जोखिम बढ़ते ही जहाज मालिक ऊंची दरें मांग रहे हैं।
कतर में रुकावट की खबर से घबराहट
ब्लूमबर्ग कि रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर में उत्पादन पर असर की खबर के बाद खरीदारों ने वैकल्पिक सप्लाई की तलाश तेज कर दी। कतर वैश्विक एलएनजी निर्यात में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में थोड़ी भी रुकावट से स्पॉट मार्केट में हलचल बढ़ना तय है। हालांकि, अभी तक इन ऊंची दरों पर बड़े सौदे पक्के होने की स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है।
शिपिंग डेटा देने वाली फर्म Spark Commodities ने हाल में औसत दर करीब 61,500 डॉलर प्रतिदिन बताई थी। मौजूदा ऑफर इससे कई गुना ज्यादा हैं। यह अंतर बताता है कि बाजार में अनिश्चितता और जोखिम का प्रीमियम जुड़ चुका है।
लंबी दूरी और सीमित जहाज भी कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका से एशिया तक लंबी दूरी तय करने की मजबूरी भी लागत बढ़ा रही है। अगर खाड़ी क्षेत्र के रूट असुरक्षित माने जाते हैं, तो जहाजों को वैकल्पिक रास्ता चुनना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ती है। प्रिसिजन एलएनजी कंसल्टिंग एलएलसी के सलाहकार Richard Pratt के अनुसार, अगर उत्पादन में लंबी कटौती नहीं होती, तो इतनी ऊंची दरें लंबे समय तक टिकना मुश्किल है।
इमरजेंसी कॉनफ्लिक्ट चार्ज लागू
तनाव के बीच कई शिपिंग कंपनियों ने खाड़ी और पश्चिम एशिया से जुड़े मार्गों पर इमरजेंसी कॉनफ्लिक्ट चार्ज जोड़ दिया है। 2 मार्च से लागू इस अतिरिक्त शुल्क के तहत 20 फीट कंटेनर पर 2,000 डॉलर, 40 फीट कंटेनर पर 3,000 डॉलर और विशेष या रेफ्रिजरेटेड कंटेनर पर 4,000 डॉलर तक वसूले जा रहे हैं।
यह शुल्क इराक, बहरीन, कुवैत, यमन, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन, मिस्र, जिबूती, सूडान और इरिट्रिया के लिए लागू बताया गया है। भारत से इन देशों को निर्यात और वहां से आयात करने वाले कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है।
आगे की राह
ऊर्जा और शिपिंग बाजार फिलहाल बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं। अगर क्षेत्र में तनाव कम होता है और सप्लाई सामान्य रहती है, तो दरों में नरमी आ सकती है। लेकिन हालात बिगड़ने पर एलएनजी की ढुलाई महंगी रह सकती है, जिसका असर गैस कीमतों और उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया की हर नई खबर पर टिकी है।
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