Founder of Hindenburg Research Nathan Anderson: हिंडनबर्ग रिसर्च ने ये जानकारी दी थी कि भारत में कुछ बड़ा होने वाला है और अब हिंडनबर्ग ने डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए ये खुलासा कर दिया है कि सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच और उनके पति के पास एक ऐसे ऑफशोर फंड में हिस्सेदारी थी जिसमें गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी द्वारा बड़ी मात्रा में पैसा निवेश किया गया था। इस कंपनी ने कहा है कि अडानी घोटाले में इस्तेमाल की गई ऑफशोर संस्थाओं में सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच की हिस्सेदारी थी। अब सवाल है कि यह हिंडनबर्ग रिसर्च क्या है और इसका मालिक कौन है? साथ ही इनकी नेटवर्थ कितनी है। चलिए आपको बताते हैं।

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ये है हिंडनबर्ग रिसर्च फर्म का मालिक

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हिंडनबर्ग रिसर्च फर्म की स्थापना साल 2017 में नाथन एंडरसन ने की थी। नाथन एंडरसन ने अमेरिका की कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और अपने करियर की शुरुआत करके फैक्ट सेट रिसर्च सिस्टम नाम की एक डाटा फर्म में काम करना शुरु किया। इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनियों के साथ काम करते थे। वॉल स्ट्रीट को दिये गए एक इंटरव्यू में एंडरसन ने बताया कि नौकरी के दौरान उन्हें ये लगा था कि जो लोग इस कंपनी में काम करते हैं (जिस कंपनी में काम करते थे) वे बहुत साधारण विश्लेषण कर रहे हैं और इसलिए उन्होंने खुद की फर्म शुरु करने का मन बनाया।

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इतनी है एंडरसन की नेटवर्थ

एंडरसन के पास कितनी संपत्ति है, इसके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी मौजूद नहीं है लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक एंडरसन की संपत्ति 5 मिलियन डॉलर (करीब 42 करोड़ रुपये) है।

कैसे पड़ा इस कंपनी का नाम हिंडनबर्ग?

इस कंपनी का नाम 'हिंडनबर्ग' कैसे पड़ा, इसकी कहानी बेहद खास है। साल 1937 में जर्मनी में हिटलर का राज था और तब जर्मनी, टैंक से लेकर हवाई जहाज और फाइटर प्लेन बनाने में जुटा था। एक कॉमर्शियल पैसेंजर प्लेन बनाया और इसका नाम रखा 'हिंडनबर्ग एयरशिप' या LZ 129 हिंडनबर्ग। यह उस दौर का सबसे बड़ा कॉमर्शियल प्लेन था। साल 6 मई 1937 को यह जहाज जर्मनी से अमेरिका के लिए उड़ा था।

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इस जहाज में एक हादसा हुआ जिसके कारण करीब 100 लोगों में से 35 लोगों की मौत हो गई. रिपोर्ट में ये जानकारी सामने निकलकर आई कि इस जहाज में हाइड्रोजन गैस के 16 बड़े गुब्बारे थे और पहले भी इस तरह के गुब्बारे से हादसे हो चुके थे। हिंडनबर्ग रिसर्च का नाम इसी हादसे से जोड़कर रखा गया है। हाल ही में हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें अडानी समूह पर स्टॉक हेरफेर और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया, जिसके कारण समूह के स्टॉक मूल्य में बड़ी गिरावट आई।